Chhattisgarh

मिथ्या दृष्टि का पुण्य फल दमदार नहीं कमजोर होता है आर्यिका पूर्णमति जी

झांसी। अभिप्राय जन कल्याणकारी नहीं है तो किये गये धार्मिक अनुष्ठान जप, तप, दान, पुण्य आदि का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता है। संसार में तमाम लोग दान, पुण्य, धर्म क्रियायें आदि तो कर रहे हैं परंतु इतनी पूजा, जप, अनुष्ठान आदि के बाद भी पाप नहीं मिटता है। इसका एक मात्र कारण है कि मानव की मिथ्या दृष्टि। यह सदबचन करगुवां जी में धर्मसभा को संबोधित करते हुये आर्यिका पूर्णमति ने कहे।
श्रद्धालुओं को दिव्य देशना देते हुए उन्होंने हिा कि धर्म करते समय भी मनुष्य की सोच होती है कि उसके घर में सुख, शांति रहे, धन दौलत की वृद्धि हो और सब ठीक रहे। यही तो मिथ्या दृष्टि है और मिथ्या दृष्टि का पुण्य फल दमदार नहीं कमजोर होता है। यदि जीव का अभिप्राय पवित्र एवं मंगल हो और उसके हाथ में तलवार भी है तो वह मंगलमय होगी किंतु जिसका अभिप्राय पवित्र नहीं है वह मंदिर में आकर धर्ममय वातावरण को अपवित्र बना देता है और उसके हाथ में धर्म ध्वजा होने पर भी देखने वालों को शूल की तरह चुभन महसूस होती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मक्षय की कामना से पुण्य अथवा जप अनुष्ठान आदि करें तो ठीक लेकिन वह तो भोग के लिए दूसरों को छोटा दिखाने और स्वयं प्रतिष्ठित दिखाने की सोचकर धार्मिक आयोजन करने लगा है बस यही कारण से उसका पुण्य फल कमजोर प्राप्त होता है।
गुरु मां ने कहा कि उत्तम द्रव्य भगवान को अर्पित करने पर उत्तम भावना बनती लेकिन संसारी लोग तो स्वयं की सुंदरता पर लाखों खर्च कर देते हैं पर धर्म क्षेत्र की सुंदरता में कौड़ी भी दान नहीं देते। घर को मरघट की संज्ञा देते हुए गुरु मां ने कहा कि स्वयं के घर नहीं भगवान के घर बनाओ, तुम्हारा घर तो खुद व खुद बन जायेगी, तभी तुम्हें परम सुख एवं आनंद की प्राप्ति होगी। राजस्थान के वांसवाडा से आये चन्द्रप्रकाश चम्पालाल जैन, विमला पाटनी दिल्ली, चक्रेश जैन, जिनेन्द्र जैन उदयपुर ने दीप प्रज्जवलित कर धर्मसभा का शुभारंभ कराया। उज्जवला जैन दमोह ने मंगलाचरण किया।
श्रुति स्कन्ध विधान 2 सितंबर को —-
धर्म प्रभावना वर्षायोग समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार जैन ने बताया कि आगामी रविवार 2 सितंबर 2018 को प्रात: 7 बजे से 4 वर्ष से 40 वर्ष तक के कुंवारे युवक-युवतियों एवं बच्चों के ज्ञानवर्णन के लिए श्रुति स्कन्ध विधान का आयोजन किया जायेगा। उक्त विधान पूज्य आर्यिका पूर्णमति के द्वारा सम्पन्न कराया जायेगा। जिसमें सकल दिगम्बर जैन समाज अपने कुंवारे बच्चों को बैठा सकता है। उक्त विधान में सभी बच्चों को कमेटी के ओर से वस्त्र आदि प्रदान किये जायेंगे। यह विधान करगुवां जी स्थित आचार्य विद्यासागर सभागार में होगा।

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