Chhattisgarh

  विश्व कल्याण हेतु 496 व्रत की साधना कर रहे हैं मुनि श्री अराध्य सागर जी महाराज

उज्जैन (विश्व परिवार)। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के सुयोग्य शिष्य मुनि श्री अराध्य सागर जी महाराज उज्जैन, मध्यप्रदेश के फ्रीगंज बोर्डिंग जैन मंदिरन में नौवां चातुर्मास कर रहे हैं। जब पूरा विश्व कोरोना महामारी की चपेट में आने लगा तो मुनि श्री अराध्य सागर जी ने 18 अप्रैल 2020 में सिंह निष्क्रीडि़त उत्तम व्रत की साधना शुरू कर दी, ये व्रत जघन्य-मध्यम-उत्तम श्रेणी में किये जाते हैं, रविवार 17 सितम्बर को इनका 131 वां उपवास था। 496 उपवासों की कड़ी में 365 अभी शेष है। पूर्व में आचार्य श्री शांति सागर जी, तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज भी कर चुके हैं, पर उत्तम व्रत रूप में इनका दावा है कि पहली बार हो रहा है। इस समय उत्सर्जन क्रम चल रहा है। अंतिम पारणा 6 सितम्बर को 12 उपवास बाद हुई थी, अब 13 उपवास के बाद 19 सितंबर को पारणा होगी, कुल 496 व्रत पूर्ण होंगे। यह जानकारी देते हुए निहाल जैन ने बताया कि 4-5 दिन अति आवश्यक होने पर थेाड़ा सा जल मुनि श्री ग्रहण करते हैं। उत्सर्जन में दो दिन बढ़ते हैं और फिर एक दिन घटता है, यह क्रम 16 व्रतों तक चलता है। उन्होंने कहा कि धन्य हैं ऐसे संत जो आज के समय में भी ऐसी कठिन तपस्या अपने कर्मों की निर्जरा व विश्व के कल्याण हेतु करते हैं। ऐसे मुनिश्री को बारम्बार प्रणाम।
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