Chhattisgarh

आचार्य  प्रसन्न सागर जी  गुरुदेव  एवम पियुष सागर जी गुरदेव  का चातुर्मास ऐतिहासिक नगरी मुरादनगर हो रहा है

मूरादनगर /औरगाबाद (विश्व परिवार)। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के उपवन सुगंधीत पुष्प भारत गौरव अंतर्मना आचार्य  प्रसन्न सागर जी  गुरुदेव  एवम पियुष सागर जी गुरदेव  का 2020 का चातुर्मास ऐतिहासिक नगरी मुरादनगर हो रहा है, श्री 1008 मुलनायक अदिनाथ  स्वामी  भगवान  के दिव्य चरणो में अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य  नवरात्रि महोसव मे दशहरा पर कहा की गर्भवती माॅ ने बेटी से पूछा -क्या चाहिए-?भाई या बहिन–?बेटी बोली –भाई ?माॅ–किसके जैसा-?बेटी -रावण जैसा ।माॅ-क्या बकती है-?पिता ने धमकाया –माॅ ने घूरकर देखा ?गाली देते हुए-? बेटी बोली –क्यू माॅ -? बहन के अपमान पर ,राज्यवंश और और प्राण लुटा देनेवाला ,शत्रु स्त्री को हरने के बाद भी स्पर्श ना करना बाला रावण जैसा भाई आज घर घर हो हो तो मेरे जैसी सभी बहिन बेटियो की शील की सुरक्षा है । माॅ सिसक रही थी और पिता आवाक था ।
इसलिये इस  युग मे रावण घर-घर हो तो अच्छा है। रावण बनना भी कहा आसान था। क्योकि रावण में अहंकार था तो पश्याताप भी था, वासना थी तो संयम भी था और माता सीता के अपरहण की ताकत थी तो बिना सहमति पर स्त्री को स्पर्श न करने का संकल्प भी था। इस लिए में कहता हूं कि इस युग मे रावण घर-घर हो तो अच्छा है। आज व्यक्ति की प्रवत्ति बुराई के मार्ग में ज्यादा लिप्त है। जीवन चर्या में संयम नही है।  उसे अपने किये का पछतावा नही होता। बल्कि  गलती कर अपने को महान समझता है। राजा रावण में बुराई के साथ अच्छे गुण भी थे। माता सीता जीवित मिली ये भगवान राम की ताकत थी। पर सीता पवित्र मिली ये रावण की मर्यादा थी। है राम तुम्हारे युग का रावण अच्छा था जो कि दस के दस चहरे दुनिया के सामने रखता था। आज व्यक्ति का चेहरा कब बदल जाये कोई भरोसा नही है। वह अंदर से क्या सोचता है और बाहर क्या करता है इसका भरोसा नही है। रावण की पराजय भगवान राम-लक्ष्मण से नही खुद के भाई विभीषण से हुई आज का जनमानस उपवास की कठिन साधना कर भूख प्यास व गर्मी तो सहन कर लेता है पर अपने घर के व्यक्ति की दो बात सहन नही कर पाता है इस लिए रामायण को पढ़ने के साथ अब राम को जीने का समय आ गया है राजा रावण तो व्यर्थ में बदनाम हो गया क्योकि जो पकड़े गए वो सभी राम निकले।                                                                                            पियुष कासलीवाल नरेंद्र अजमेरा 

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