Chhattisgarh

सब कुछ आकाश नगर सम बादलों के समान क्षणिक है : आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

नेमावर (विश्व परिवार) (05/01/2021)। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज इन दिनों नेमावर में ससंघ विराजमान हैं, उन्होंने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि- जिस प्रकार आकाश में बादलों का जो चित्र होता है, वह कुछ ही समय में परिवर्तित हो जाता है, क्षणिक होता है, उसी प्रकार से यह जीवन क्षणिक है, कब विनष्ट जावे पता नहीं इसलिए आकाश नगर सम ऐसी उपमा इस जीवन को दी।
सूत्र-अनमोल
– सूर्य तो दिखता है परन्तु सूर्य की गति नहीं दिखती इतना धीरे-धीरे चलकर वह अस्ताचल की ओर चला जाता है।
– जीवन का सूर्य ढलें उससे पूर्व किसान की भांति कुछ काम कर लो।
– उद्ेग से अनर्थ घटित होता है तो संवेग भाव से जो अनर्थ होने वाला हो वह भी टल जाता है।
– संवेग भाव दुर्गति से बचा सद्गति की ओर ले जाते हैं।
– जैसे गोद में खेलने वाला बालक भी माँ के भावों को समझता है, चुटकी बजाने पर दुध पीने लगता है उसी तरह हमें भी अतीत की घटनाओं से पाठ लेना चाहिए।
– समय पर वितरण करना आवश्यक है यदि वितरण नहीं तो तरण कैसे होगा? अमेरिका में जो भूखमरी की समस्या आई उसका मुख्य कारण वितरण का अभाव ही है।
– प्रति व्यक्ति 36 करोड़ की अर्थव्यवस्था बाहृय राष्ट्र में करोड़ो लोग एक-एक ग्रास को तरस रहे हैं क्योंकि तिजोरियों में भर रखा है, कालाबाजारी कर रहे हैं, दिन ढलने से पूर्व परिवर्तन आवश्यक है।
      – विद्यावाणी संकलन
——

Leave a Reply

Your email address will not be published.