Chhattisgarh

आमद कम, खर्चा घणा, लक्षण है मिट जाने का : मुनि श्री संधानसागर जी महाराज

बाजना (विश्व परिवार)। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावकि शिष्य, युवा तरूणाई के प्रखर वक्ता मुनिश्री 108 संधानसागर जी महाराज ने बाजना, नगर प्रवेश के दिन उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डूबेगा रे तीन जणा, पूंजी कम, व्यापार घणा, आमद कम, खर्चा घणा एवं कूबत कम-खर्चा घणा। पूज्य मुनिश्री जी ने कहा कि ऋण लेना-ऋण देना, ऋण चुकाना एवं ऋण उतारना, इन चार बिन्दुओं को जिसने समझ लिया वह ऋण चुकाएगा और ऋण उतारेगा, ऋण लेने को अच्छा नहीं समझेगा। पूज्य मुनिश्री जी ने कहा कि – कमजोर व्यक्ति ऋण लेता है, समर्थवान कर्ज/ऋण देता है, जो वफादार हो वहीं ऋण चुकाता है, जो हमेशा कृतज्ञ बना रहे वह ऋण उतारता है, निति वाक्यामृत में एक जगह आया है कि ओवर एस्टीमेट बिजनेस कभी न करें। पूज्य मुनिश्री जी ने कहा कि चार प्रकार के ऋण होते हैंं- पैसों का ऋण, पाप का ऋण, पुण्य का ऋण, एवं कत्र्तव्य का ऋण, सूदखोर की तीसरी पीढ़ी कंगाल होती है, पाप का ऋण लिया जाता वह तो ऑटोमेटिक चढ़ता जाता है, अन्यथा वह तो बढ़ता ही चला जाएगा। पुण्य का ऋण भी होता है, जो मंदिर क्षेत्र है उन्हें सुरक्षित रखकर नये क्षेत्र बनाकर पुण्य का ऋण उतारता है, कत्र्तव्य का ऋण भी चार प्रकार का होता है, माता-पिता का ऋण, गुरूजन का ऋण, समाज का ऋण, एवं मातृभूमि का ऋण। पूज्य मुनिश्री जी ने कहा कि आज समय का अभाव है इसलिए बीच में ही विराम करते हैं। उन्होंने बाजना पर कहा कि- बा-जना मतलब उन जना (लोगों) को याद करो जिनसे भारत पुन: प्रतिभारत बन जाएगा। भागना नहीं है, अब तो जागना है बाजना वालों को संबोधन करते हुए कहा कि गुरू-शिष्य का संबंध फूल-सुराज का होता है, गुरू के आते ही सबके मुख कमल खिल जाते हैं।
बाजना में हुआ भव्य मंगल प्रवेश
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 दुर्लभसागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 संधानसागर जी महाराज की भव्य अगवानी आज बाजना नगरवासियों ने की। प्राकृतिक छटाओं से घिरा, प्राचीन ऐतिहासिक स्थल भीमकुण्ड के नाम से प्रसिद्ध यह पर्यटन स्थल है। मुनि श्री संधानसागर जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि छोटे से गांव द्वारा यह बड़ा धमाका किया गया, दिव्यघोष-संगीत पार्टी के साथ पुरे समाज ने हर्षोल्लास से मुनिद्वय की अगवानी की तथा ग्रीष्मकालीन बाचना हेतु निवेदन किया।
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