भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास लेने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। साइना ने साफ कहा कि अब उनका शरीर एलीट लेवल की बैडमिंटन की मांगों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, इसलिए खेल से दूरी बनाना ही सही फैसला है।
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान साइना ने बताया कि वह दो साल पहले ही प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन छोड़ चुकी थीं। उनका मानना है कि अगर कोई खिलाड़ी आगे खेलने की स्थिति में नहीं है, तो उसे बिना किसी दबाव के खेल को अलविदा कह देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने तरीके और अपनी शर्तों पर करियर को खत्म करना बेहतर समझा, इसलिए औपचारिक घोषणा की जरूरत महसूस नहीं हुई।
साइना ने आखिरी बार साल 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मैच खेला था। इससे पहले रियो ओलंपिक 2016 के दौरान लगी गंभीर घुटने की चोट ने उनके करियर को गहराई से प्रभावित किया। हालांकि, उन्होंने जबरदस्त जज्बा दिखाते हुए वापसी की और 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक तथा 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
साल 2024 में साइना ने यह भी खुलासा किया था कि उनके घुटनों में आर्थराइटिस है और कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है, जिससे शीर्ष स्तर पर खेलना लगभग असंभव हो गया है।
साइना नेहवाल की उपलब्धियों पर एक नजर
लंदन ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक, ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी
अप्रैल 2015 में बनीं दुनिया की नंबर-1 महिला बैडमिंटन खिलाड़ी
विश्व चैंपियनशिप में 2015 का सिल्वर मेडल और 2017 का ब्रॉन्ज मेडल
कॉमनवेल्थ गोल्ड खेलों में 2010 (दिल्ली) और 2018 (गोल्ड कोस्ट) में स्वर्ण पदक
2008 में वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियन बनीं
खेल रत्न (2009), पद्म श्री (2010) और पद्म भूषण (2016) से सम्मानित
साइना नेहवाल का संन्यास भारतीय बैडमिंटन के एक स्वर्णिम अध्याय के अंत जैसा है। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।





