धर्म

गिरनारजी में प्रथम बार होगा राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्संवाद एवं राष्ट्रीय अधिवेशन

गिरनार में विद्वत्संवाद की पत्रिका का विमोचन
औरंगाबाद/ गिरणार (विश्व परिवार)। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनारजी में प्रथम बार प्राकृत भाषा को समर्पित एक राष्ट्रीय स्तर का महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन होने जा रहा है। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्संवाद, प्रा.भा.वि.फा. राष्ट्रीय अधिवेशन तथा पुरस्कार समर्पण समारोह का आयोजन दिनांक 28 से 30 जनवरी 2026 तक श्री समवशरण मंदिर (विश्व शांति निर्मल ध्यान केन्द्र) में किया जा रहा है। इस गरिमामयी आयोजन को प्राकृताचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज ससंघ का परम सान्निध्य प्राप्त होगा। विद्वत्संवाद का केंद्रीय विषय “भारतीय भाषाएं एवं प्राकृत : भारतीय ज्ञान परम्परा के संदर्भ में” निर्धारित किया गया है।
तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन के अंतर्गत 28 जनवरी 2026 को प्रातः 8 से 10.30 बजे उद्घाटन सत्र एवं विद्वत्संवाद आयोजित होगा, तत्पश्चात दोपहर 1 से 5 बजे तथा सायं 7 से 9 बजे विद्वत्संवाद सत्र संपन्न होंगे। 29 जनवरी को भी प्रातः एवं दोपहर में विद्वत्संवाद तथा सायं 7 से 9 बजे प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। 30 जनवरी को प्रातः 8 से 10.30 बजे विद्वत्संवाद के साथ पुरस्कार समर्पण समारोह तथा दोपहर 1 से 4 बजे समापन समारोह संपन्न होगा। आयोजन के शिरोमणि संरक्षक प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, कुलपति, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली हैं। स्वागत अध्यक्ष एवं अधिवेशन पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्री मान् सौभाग्यमल-राजेन्द्र कुमार कटारिया अहमदाबाद परिवार, परम संरक्षक के रूप में ब्र. सुमति भैयाजी (अधिष्ठाता, विश्वशांति निर्मल ध्यान केन्द्र, गिरनारजी), श्री अजितजी कासलीवाल सेलम एवं श्री पारस जैन बज (अध्यक्ष, गुजरात अंचल तीर्थक्षेत्र कमेटी) मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. लोकमान्य मिश्र, निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर द्वारा की जाएगी। आयोजन की समन्वय समिति में डॉ. धर्मेन्द्र कुमार जैन, डॉ. प्रभातकुमार दास, डॉ. सतेन्द्र कुमार जैन द्वारा कार्य को गति प्रदान कर रहे हैं। आयोजन का संयोजन डॉ. आशीष जैन आचार्य शाहगढ़ सागर एवं डॉ. आशीष जैन शास्त्री बम्हौरी द्वारा किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल प्राकृत भाषा के शैक्षणिक विमर्श को नई दिशा देगा, बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में भी मील का पत्थर सिद्ध होगा।
दिनांक 22 जनवरी 2026 को आचार्यश्री सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में विद्वत्संवाद के पोस्टर, पत्रिका एवं फ्लेक्स का लोकार्पण एवं विमोचन किया गया। जिसे अधिवेशन के सह-संयोजक पं.श्री रमेशचन्द जैन शास्त्री अहमदाबाद द्वारा संपादित किया।

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