अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आखिरकार वह सम्मान मिल ही गया, जिसकी वह लंबे समय से चर्चा करते रहे थे। भले ही यह नोबेल शांति पुरस्कार औपचारिक रूप से उन्हें नहीं मिला हो, लेकिन वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को भेंट कर दिया है। इसे ट्रंप ने खुशी-खुशी स्वीकार किया और इसे आपसी सम्मान का प्रतीक बताया।
व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के बाद ट्रंप ने मचाडो की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनके शांति प्रयासों से प्रभावित होकर मचाडो ने अपना नोबेल मेडल उन्हें सौंपा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि मचाडो एक साहसी और असाधारण महिला हैं, जिन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष झेला है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप इस मेडल को अपने पास रखने वाले हैं।
गौरतलब है कि ट्रंप खुद कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आठ बड़े संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई है, जिनमें भारत–पाकिस्तान तनाव का जिक्र भी शामिल रहा है। इसी आधार पर वह लगातार नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करते रहे थे। जब 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मचाडो को मिला, तो ट्रंप की नाराजगी भी खुलकर सामने आई थी।
मारिया मचाडो लंबे समय तक वेनेजुएला में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के दमन का सामना करती रहीं। मादुरो शासन से बचने के लिए वह करीब 11 महीने तक छिपकर रहीं और नोबेल पुरस्कार समारोह में उनकी बेटी ने उनकी ओर से सम्मान ग्रहण किया था। बाद में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा भी चली कि मचाडो को देश की सत्ता सौंपी जा सकती है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को समर्थन देने का फैसला किया।
नोबेल संस्थान का कहना है कि कानूनी रूप से मचाडो अपना पुरस्कार ट्रंप को नहीं दे सकतीं और यह कदम केवल प्रतीकात्मक है। इसके बावजूद इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक असाधारण घटना माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि मचाडो ने ट्रंप को अपना नोबेल मेडल देकर राजनीतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश की है, क्योंकि उन्हें लंबे समय से वेनेजुएला की संभावित लोकतांत्रिक नेता के तौर पर देखा जाता रहा है।





