गाटम पंचायत में बदहाली की हदें पार, नकुनलार–सुकमा गडमिड़ी – मार्ग से जुड़ी सड़क ने तोड़ा प्रशासन का दावा |
नितेश मार्क ——
जिले की ग्राम पंचायत गाटम में सड़क की भयावह स्थिति ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को नरक बना दिया है। सूरनार–लखपाल–गढ़मिरी से होते हुए सीधे
नकुनलार–सुकमा मुख्य सड़क को जोड़ने वाली यह अहम सड़क, जो क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है, आज खुद बदहाली की शिकार है।
हालात ऐसे हैं कि इस मार्ग पर चलना तो दूर, पैदल गुजरना भी जोखिम भरा हो गया है।
सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई परतें और बारिश में जमा होने वाला पानी के कीचड़ लोगों के लिए स्थायी परेशानी बन चुका है। बसों और चारपहिया वाहनों का चलना लगभग असंभव हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन चालक हर सफर में दुर्घटना के डर के साथ निकलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क अब सड़क कम और दुर्घटनाओं का जाल ज्यादा बन चुकी है।
इस बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और किसानों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं, मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं और किसान अपनी उपज समय पर बाजार नहीं पहुंचा पा रहे हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब धूल गिट्टी और गड्डे से भरे सड़क को पूरी तरह निगल लेते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। निरीक्षण और मरम्मत के नाम पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है। सवाल यह है कि जब यह सड़क दो जिलों और कई गांवों को जोड़ती है, तो फिर इसे नज़रअंदाज़ क्यों किया जा रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे, आपात मरम्मत और स्थायी पुनर्निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जल्द ही सड़क को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस लाइफलाइन सड़क की सुध कब लेता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी।





