रायपुर (विश्व परिवार)। महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल काॅलेज (मैक), समता काॅलोनी रायपुर में 23/01/2026 को ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का पर्व बसंत पंचमी अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर काॅलेज परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए ही बसंत पंचमी से विद्या का आरंभ करना बेहद शुभ माना जाता है।
कार्यक्रम की शुरूआत भगवान गणेश एवं माँँ सरस्वती की प्रतिमा पर पूजन, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर विशेष पूजा-अर्जना पुरे विधि विधान से पंडित आदरणीय गिरिजा शंकर गौतम के द्वारा करवाया गया। पूजा पूर्व चेयरमेन श्री राजेश अग्रवाल, काॅलेज के ट्रस्टी राजेन्द्र अग्रवाल, काॅलेज की सेक्रेटरी सरिता अग्रवाल के द्वारा सम्पन्न हुआ। इस विशेष पूजा में काॅलेज का माहौल मानो मंदिर प्रांगण सा लगने लगा।
इस परम्परा को कायम रखते हुए प्रति वर्ष की भांति, इस वर्ष भी पूरे जोर शोर से काॅलेज के सभी छात्र-छात्राएं, सभी विभागाध्यक्ष एवं सभी शिक्षकगण बसंत पंचती के इस पावन अवसर पर अपना पूर्ण समर्पण एवं योगदान देते नजर आए।
मैक म्यूजिक के छात्रों द्वारा संुदर भजन प्रस्तुत किया गया जिसमें है- खुशी श्रीवास्तव-पायो जी मैंने,अपूर्व तिवारी- हे दुःख भंजन मारूति नंदन, रसिका थानवी-सकल बान/ राग बसंत, हुनर-तुम उठो सिया श्रृंगार करो,शरण्या- लेके पूजा की थाली, एवं काॅलेज के प्राध्यापको के द्वारा सुन्दर भजन जैसे सीमा पाण्डेय- राम को देख कर, अलेख्यिा- राम-राम, नवीनढा दो घर को, सुरेश जैन-लेके पूजा की थाली, ऐसा सुंदर भजन प्रस्तुतियाँ दी गई, विशेष रूप से काॅलेज के पूर्व चेयरमेन राजेश अग्रवाल जी ने सिया राम, बिगड़ी बना दे, हे राम रे, जमुना किनारे जैसे सुंदर भजन प्रस्तुती से छात्र-छात्राएं झुमने लगे। जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई।
यह कार्यक्रम काॅलेज के चेयरमेन रमेश अग्रवाल जी, प्राचार्य डाॅ. जैस्मिन जोशी एवं उप-प्राचार्य डाॅ. श्वेता तिवारी के मार्ग दर्शन में आयोजित किया गया। पीले वस्त्रों से सुसज्जित सभी शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीकात्मक संदेश प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण कर किया गया। कार्यक्रम में पूरा मैक परिवार उपस्थित रहा । इस कार्यक्रम की इंचार्ज शोभा साहु एवं प्रोग्राम डायरेक्टर हीना शुक्ला रही।





