बीजापुर (विश्व परिवार)। एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं, वहीं दूसरी ओर बस्तर में एक के बाद एक जिले में माओवादियों का समर्पण जारी है. सुकमा में 21 माओवादियों के बाद बीजापुर में 30 माओवादियों ने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला लिया है. इन 30 माओवादियों के सिर पर करीब 85 लाख रुपए का ईनाम घोषित था।
सरकार की महत्वपूर्ण “नियद नेल्लानार” व पुर्नवास नीति से प्रभावित होकर एक डिवीसीएम सहित कुल 30 माओवादी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में 20 महिला माओवादी व 10 पुरुष माओवादी शामिल हैं. इन 30 माओवादियों पर कुलमिलाकर 85 लाख का ईनाम घोषित किया था. ये सभी आत्मसमर्पण माओवादी फायरिंग, आईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसे अन्य घटनाओं में शामिल थे।
माओवादियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ.जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया. पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को अधिकारियों ने 50-50 हजार रुपए नगद राशि प्रदान की गई।
बता दें कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक कुल 918 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, वहीं वर्ष 2025 से लेकर अब तक कुल 1163 माओवादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा सुरक्षाबल के जवानों ने 231 माओवादियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया है।
मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम – मुख्यमंत्री साय
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल ₹85 लाख से अधिक का इनाम घोषित था।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।






