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बिहार पहुंचा दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग, 17 जनवरी को हेलीकॉप्टर से होगा भव्य जलाभिषेक

दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग अब बिहार की धरती पर अपने अंतिम गंतव्य पर पहुंच चुका है। करीब 210 मीट्रिक टन वजनी यह अद्भुत शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड के कैथवलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके आगमन के साथ ही पूरे इलाके में भक्ति और उत्सव का माहौल बन गया है, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

17 जनवरी को होगी विधिवत स्थापना

इस विशाल शिवलिंग की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा 17 जनवरी 2026 को शुभ मुहूर्त में की जाएगी। इस अवसर को विशेष बनाने के लिए शिवलिंग पर हेलीकॉप्टर से जलाभिषेक किया जाएगा। जलाभिषेक के लिए पवित्र जल हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर से लाया गया है। स्थापना से जुड़ी सभी तैयारियां 15 जनवरी तक पूरी कर ली जाएंगी।

सहस्रलिंगम स्वरूप का विशेष महत्व

विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने वाला यह शिवलिंग सहस्रलिंगम स्वरूप का है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसकी प्राण-प्रतिष्ठा 1008 शिवलिंगों की प्राण-प्रतिष्ठा के समान मानी जाती है। इसी कारण इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और दिव्य स्वरूप देने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।

तमिलनाडु से बिहार तक ऐतिहासिक यात्रा

इस विशाल शिवलिंग का निर्माण महाबलीपुरम में किया गया था। 21 नवंबर को वहां से यात्रा प्रारंभ होने के बाद यह आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार पहुंचा। गोपालगंज में कुछ समय ठहरने के बाद इसे मोतिहारी के केसरिया लाया गया। करीब 2178 किलोमीटर की यह यात्रा अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

विराट रामायण मंदिर होगा भव्यतम

कैथवलिया में बन रहा विराट रामायण मंदिर लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। मंदिर परिसर में 22 छोटे-बड़े मंदिर और 18 भव्य शिखर होंगे। मुख्य मंदिर की लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी, जबकि अन्य शिखर 180, 135, 108 और 90 फीट ऊंचे होंगे। पूर्ण होने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर परिसर माना जाएगा।

2030 तक पूरा होगा सपना

इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण महावीर मंदिर न्यास द्वारा किया जा रहा है। न्यास के सचिव सायन कुणाल के अनुसार, यह उनके दिवंगत पिता आचार्य कुणाल किशोर का सपना था। मंदिर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से चल रहा है और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भक्तों में जबरदस्त उत्साह

शिवलिंग के आगमन से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। दूर-दूर से भक्त पूजा और दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन और मंदिर न्यास ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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