केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को 8वां वेतन आयोग का इंतजार है। सभी की नजर इस पर टिकी है कि सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी आखिर कब लागू होगी और इससे जेब पर कितना असर पड़ेगा।
कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?
आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होना था, लेकिन जनवरी खत्म होने के बावजूद न सैलरी बढ़ी है और न ही पेंशन। रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, इस देरी का असर न सिर्फ 2026-27 के बजट पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी दबाव बढ़ेगा।
सरकारी खजाने पर क्यों पड़ेगा असर?
ICRA का कहना है कि वेतन आयोग का असली असर FY28 में दिखेगा, क्योंकि तब सरकार को 1 जनवरी 2026 से लागू मानकर 15 महीने या उससे ज्यादा का एरियर एक साथ देना पड़ सकता है। अनुमान है कि उस साल सिर्फ सैलरी पर सरकारी खर्च 40–50% तक बढ़ सकता है। तुलना करें तो 7वें वेतन आयोग में छह महीने की देरी से ही खर्च करीब 20% बढ़ गया था।
देरी की वजह क्या है?
सरकार ने जनवरी 2025 में आठवें वेतन आयोग का गठन किया और उसे रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यानी रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है। इसके बाद सिफारिशों की समीक्षा, मंजूरी और लागू करने की प्रक्रिया होगी। इसी वजह से अब माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकता है—हालांकि, जब भी लागू होगा, एरियर जरूर मिलेगा।
कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
फिलहाल फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। अनुमान है कि यह 2.13 से 2.86 के बीच हो सकता है। तुलना के लिए, 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 41,000 से 51,480 रुपये तक जा सकता है।
फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक मल्टीप्लायर होता है। जैसे, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.78 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी 50,040 रुपये हो जाएगी।
कुल मिलाकर, 8वें वेतन आयोग से सैलरी और पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।





