नई दिल्ली (विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने का स्वागत किया। तीनों नेताओं ने इसे भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।
व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन को मिलेगा बल
16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि यह ऐतिहासिक समझौता भारत और ईयू के बीच व्यापार और निवेश को मजबूत करेगा। इससे साझा समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा, मजबूत और विविध सप्लाई चेन तैयार होंगी और सतत व समावेशी विकास को गति मिलेगी।
डब्ल्यूटीओ सुधारों की जरूरत पर जोर
नेताओं ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डब्ल्यूटीओ में जरूरी और व्यापक सुधार अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि सभी देशों के हितों को आगे बढ़ाया जा सके।
अनिश्चित वैश्विक माहौल में मजबूत आर्थिक रिश्तों की अहमियत
संयुक्त बयान में कहा गया कि मौजूदा समय में जब दुनिया अनिश्चितताओं और व्यवधानों का सामना कर रही है, ऐसे में भारत और ईयू के बीच मजबूत आर्थिक संबंध विकास, रोजगार, हरित बदलाव, औद्योगिक प्रगति और भरोसेमंद सप्लाई चेन के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
एफटीए के पूर्ण क्रियान्वयन और नए समझौतों पर सहमति
भारत और ईयू के नेताओं ने एफटीए को पूरी तरह लागू करने का संकल्प लिया। साथ ही अपनी टीमों से जल्द से जल्द निवेश संरक्षण समझौते (आईपीए) और भौगोलिक संकेत (जीआई) समझौते पर बातचीत पूरी करने को कहा। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई।
ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल बनेगी सहयोग का आधार
संयुक्त बयान में कहा गया कि तकनीकी क्षेत्र में भारत और ईयू की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं। इसलिए रिसर्च, इनोवेशन और कारोबार को जोड़ते हुए पूरे वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस दिशा में भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) को तकनीकी साझेदारी का अहम आधार बताया गया।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा
दोनों पक्ष डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और उभरती तकनीकों, इनोवेशन व रिसर्च में सहयोग मजबूत करने पर सहमत हुए। इसके तहत भारत-ईयू इनोवेशन हब और भारत-ईयू स्टार्टअप पार्टनरशिप शुरू करने का निर्णय लिया गया।
वैज्ञानिक सहयोग और हरित ऊर्जा पर फोकस
नेताओं ने भारत-ईयू वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग समझौते को 2030 तक बढ़ाने का स्वागत किया और ईयू के रिसर्च प्रोग्राम ‘होराइजन यूरोप’ से भारत को जोड़ने पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई। इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग तेज करने के लिए भारत-ईयू ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के गठन और 2026 में भारत-ईयू विंड बिजनेस समिट के आयोजन का भी स्वागत किया गया।
कनेक्टिविटी और नए व्यापारिक अवसर
दोनों पक्ष क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और भारतीय व यूरोपीय कंपनियों के लिए नए व्यापारिक अवसर खोलने पर भी सहमत हुए। इसके तहत भारत-ईयू कनेक्टिविटी पार्टनरशिप, एविएशन डायलॉग, समुद्री परिवहन सहयोग और भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) में प्रगति का उल्लेख किया गया।
एआई इम्पैक्ट समिट और बिजनेस फोरम पर चर्चा
ईयू नेताओं ने 19–20 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट का स्वागत किया और इसे सफल बनाने की उम्मीद जताई। इसके अलावा, नेताओं ने भारत-ईयू बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से निजी निवेश बढ़ाने, नए व्यापारिक प्रयास शुरू करने और भारत-ईयू आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने का आह्वान किया।




