- मुख्यमंत्री गृहग्राम बगिया की युवती पत्रकारवार्ता में फूट- फूटकर रोई
रायपुर (विश्व परिवार)। सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2023 के पात्र अभ्यर्थियों के चयन में राज्य शासन के शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा भारी अनियमितता बरती गई है। हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा उक्त मामले में दिए गए निर्णय के अवमानना के सिलसिले में चार बार हाईकोर्ट जाने के उपरांत भी अब तक अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिला है। राज्य शासन के डीपीआई एवं शिक्षा सचिव को भी इस संबंध में कई बार अवगत कराया गया इसके बावजूद भी अपात्र लोगों को भर्ती किया गया। पत्रकारवार्ता में प्रांत अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद साहू ने इस संबंध में शिक्षामंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे जान बूझकर हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने दे रहे हैं। तूता धरनास्थल में 24 दिसंबर से 26 से 21 अभ्यर्थियों को बर्खास्त करने के मामले को लेकर आमरण अनशन 36वें दिन भी जारी रहा। उन्होंने बताया कि उक्त भर्ती परीक्षा के लिए 24 दिसंबर के आदेश के विरूद्ध 26 सितंबर 2025 के आदेश में हाईकोर्ट ने डीएड अभ्यर्थियों की भर्ती के लिए दो माह का समय दिया था। इसके बाद भी राज्य शासन द्वारा बरता जा रहा है। अब तक चार मरीजों को धरनास्थल से तबियत बिगडऩे पर हास्पीटल में भर्ती किया गया है। 2300 अभ्यर्थियों की भर्ती लगभग 3 साल से लंबित हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृहक्षेत्र बगिया से आई आदिवासी अभ्यर्थी जिसके माता पिता का निधन 8वीं कक्षा के दौरान ही हो गया था। वह फूट-फूटकर रोने लगी और उन्होंने कहा कि वे बड़ी मुश्किल से अपने भाई बहनों को पढ़ा पा रही हैं। कोर्ट की लड़ाई के लिए अब उनके पास पैसा नहीं बचा है। जीविका चलाना मुश्किल हो गया है। पत्रकारवार्ता में अनेक अभ्यर्थियों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बाद भी शिक्षा विभाग के प्रशसनिक अधिकारी चार बार हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना करने का दुस्साहस कर चुके हैं। यह आपत्तिजनलक हैं।





