- अमृत काल 2047 की दिशा में नवाचार और उद्यमिता ही होंगे राष्ट्रीय विकास के आधार: ओ.पी. चौधरी
रायपुर (विश्व परिवार)। भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर ने आज अपने परिसर में अंतरराष्ट्रीय केस सम्मेलन (ICC) 2026 का शानदार उद्घाटन किया। पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुए इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उभरते बाजारों के संदर्भ में केस-आधारित शिक्षण को मजबूत करना है। इस वैश्विक मंच पर शैक्षणिक शोध, व्यावहारिक प्रबंधन और शासन की चुनौतियों पर सार्थक चर्चा के लिए दुनिया भर के शिक्षाविद और नीति निर्माता एकत्रित हुए हैं।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के माननीय वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने भारत की आर्थिक प्रगति और भविष्य की दृष्टि साझा की। उन्होंने कहा, “अमृत काल 2047 की दिशा में नवाचार, उद्यमिता और युवाओं की भागीदारी ही सतत राष्ट्रीय विकास के प्रमुख आधार होंगे।” श्री चौधरी ने पिछले दशक में भारत के 10वीं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के सफर और जीएसटी जैसे बड़े सुधारों का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

आईआईएम रायपुर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर ने अपने संबोधन में स्वदेशी केस पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केस-आधारित शिक्षण भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, जो सिद्धांत और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के बीच सेतु का काम करता है। वहीं, मुख्य वक्ता के रूप में अमेरिकी विश्वविद्यालय, शारजाह की प्रोफेसर वर्जीनिया बोडोलिका ने मानवीय मूल्यों, सृजनशीलता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को भविष्य के नेतृत्व के लिए अनिवार्य बताया।
सम्मेलन के पहले दिन शिक्षा और उद्योग जगत के बीच गहन संवाद के लिए कई पूर्ण सत्र आयोजित किए गए। हार्वर्ड बिजनेस पब्लिशिंग के अमित सिद्धार्थ और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर देबजीत रॉय ने केस लेखन और वैश्विक प्रकाशन प्रक्रियाओं पर अपने विचार साझा किए। इसके अतिरिक्त, एक हाई-प्रोफाइल ‘उद्योग पैनल’ में छत्तीसगढ़ की विशेष सचिव (सुशासन) सुश्री रजत बंसल (आईएस), सेल के कार्यकारी निदेशक श्री पवन कुमार और पंजाब नेशनल बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख आशीष चतुर्वेदी ने डिजिटल शासन और सार्वजनिक क्षेत्र में बदलावों पर चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय केस सम्मेलन 2026 के माध्यम से आईआईएम रायपुर ने एक बार फिर शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।






