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रक्षा अनुसंधान और उन्नत प्रौद्योगिकी को नई मजबूती: एनआईटी रायपुर और डीआईएटी पुणे के बीच रणनीतिक समझौता

रायपुर (विश्व परिवार)। देश में रक्षा उन्मुख अनुसंधान, उन्नत प्रौद्योगिकी और उच्च तकनीकी शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर, जो एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, और रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान (डीआईएटी), पुणे, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, के बीच पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह समझौता ज्ञापन 1 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर एन. वी. रमण राव और रक्षा उन्नत प्रौद्योगिकी संस्थान पुणे के कुलपति डॉ. बी. एच. वी. एस. नारायण मूर्ति की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर डॉ. एस. सान्याल, अधिष्ठाता (कॉरपोरेट संबंध एवं संसाधन संग्रहण) सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
इस समझौते के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के पारस्परिक हितों के क्षेत्रों में अकादमिक, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें रक्षा अनुप्रयोगों पर विशेष बल दिया गया है। दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, सह-लेखित शोध प्रकाशनों, शिक्षण गतिविधियों, पाठ्यक्रम विकास तथा विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेंगे।
इस सहयोग की एक प्रमुख विशेषता संयुक्त रूप से अभिकल्पित स्नातकोत्तर शैक्षणिक कार्यक्रमों की संभावनाओं का अन्वेषण है, जिसके अंतर्गत परास्नातक एवं शोध (पीएच.डी.) विद्यार्थियों का सह-पर्यवेक्षण शामिल होगा। समझौते के तहत दोनों संस्थानों को विशेष प्रयोगशालाओं, उन्नत सॉफ्टवेयर और अनुसंधान अवसंरचना तक पारस्परिक पहुँच भी प्राप्त होगी, जिससे अनुसंधान एवं नवाचार को नई गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, संयुक्त प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों, अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संकाय विकास पहलों तथा रक्षा अनुप्रयोग उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रमों की भी परिकल्पना की गई है।
समझौता ज्ञापन में उभरते हुए और रणनीतिक महत्व के कई प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित सहयोग हेतु चिन्हित किया गया है, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, डेटा विज्ञान, डिजिटल फॉरेंसिक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग तथा अन्य रणनीतिक एवं उन्नत प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं। इन क्षेत्रों में संयुक्त उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) की स्थापना की संभावनाएँ भी तलाशी जाएँगी।
यह सहयोग रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सामाजिक एवं रणनीतिक प्रभाव वाले अनुसंधान, अकादमिक गुणवत्ता, नवाचार क्षमता और प्रौद्योगिकी विकास को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग से डॉ. नितेश के. भारद्वाज तथा यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चंदेल को दोनों संस्थानों के बीच सभी सहयोगात्मक गतिविधियों के समन्वय एवं क्रियान्वयन के लिए नामित किया गया है।
यह समझौता देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों और रक्षा अनुसंधान प्रतिष्ठानों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उन्नत प्रौद्योगिकियों और रक्षा नवाचार में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त आधार प्रदान करता है।

 

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