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लोकसभा में गूंजा छत्तीसगढ़ का निर्यात स्वर, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आदिवासी उत्पादों के वैश्वीकरण की उठाई आवाज

  • वनवासी अंचलों के उत्पाद बनेंगे वैश्विक ब्रांड, लोकसभा में बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर केंद्र का भरोसा
  • ‘जिलों को निर्यात केंद्र’ से बदलेगी छत्तीसगढ़ की तस्वीर, आदिवासी और नक्सल प्रभावित जिलों पर फोकस
  • स्थानीय से वैश्विक तक छत्तीसगढ़ की उड़ान, बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में रखा आर्थिक सशक्तिकरण का रोडमैप

नई दिल्ली/रायपुर (विश्व परिवार)। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को लोकसभा में छत्तीसगढ़ के निर्यात सामर्थ्य, आदिवासी बहुल जिलों के आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के वैश्वीकरण का मुद्दा उठाया।
श्री अग्रवाल ने कहा कि, छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल एवं नक्सल प्रभावित जिलों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध पारंपरिक वन उत्पाद, हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरी को यदि सही नीतिगत समर्थन मिले, तो वे उच्च मूल्य वाले वैश्विक निर्यात उत्पाद बन सकते हैं।
श्री अग्रवाल ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ‘जिलों को निर्यात केंद्र’ पहल के अंतर्गत इन क्षेत्रों के लिए ठोस हस्तक्षेप, वित्तीय सहायता और परिणाम-आधारित निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।
जिसपर वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि ‘निर्यात केंद्र के रूप में जिले’ (DEH) विदेश व्यापार महानिदेशालय की एक क्षमता निर्माण योजना है, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देना, स्थानीय विनिर्माण को सुदृढ़ करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्यों और जिलों को निर्यात प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाती है।
वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक के लिए स्वीकृत निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के निर्यातक, एमएसएमई और संस्थान ‘निर्यात दिशा’ घटक के माध्यम से बाजार पहुंच, गुणवत्ता एवं अनुपालन, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुविधा से संबंधित सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईपीएम योजना के तहत पहले से संचालित ब्याज समतुल्यकरण योजना और बाजार पहुंच पहल को एकीकृत डिजिटल प्रणाली में सम्मिलित किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के एमएसएमई को सहायता प्राप्त करने में प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और समय की बचत होगी।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनवासी क्षेत्रों के उत्पाद और पारंपरिक हस्तशिल्प न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी बड़ी मांग है। केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से इन उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना छत्तीसगढ़ के युवाओं और कारीगरों के लिए स्थायी रोजगार का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजना की परिणाम-आधारित निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि लाभ वास्तविक निर्यात, आय वृद्धि और रोजगार सृजन के रूप में छत्तीसगढ़ के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निर्यात को जिला स्तर से मजबूत करने की यह नीति छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी।

डिजिटल संसद

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