नई दिल्ली (विश्व परिवार)। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की कई पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव की नोटिस में कई कमियां सामने आई हैं। इन कमियों को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने निर्देश दिए हैं कि खामियों को दूर किया जाए, ताकि प्रस्ताव तकनीकी आधार पर खारिज न हो। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में मौजूद त्रुटियों को ठीक कर उसे दोबारा प्रक्रिया में लाया जाए।
ओम बिरला के खिलाफ क्यों अविश्वास प्रस्ताव?
गौरतलब है कि ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इसलिए लाया गया है क्योंकि विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि उनके नेताओं को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। भारतीय संविधान के आर्टिकल 94 C में इसे लेकर जिक्र है। साथ ही लोकसभा के नियमों, परंपराओं में इसका जवाब दिया गया। इस रिमूवल मोशल या स्पीकर (अध्यक्ष) को पद से हटाने का प्रस्ताव कहा गया।
संविधान के आर्टिकल 94 सी के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर एक रेजुलेशन (संकल्प) द्वारा लोकसभा के बहुमत से पारित होने पर पद से हटाए जा सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा का सक्रिय सदस्य ही ला सकता है। प्रस्ताव के नोटिस की प्रक्रिया और चर्चा का समय लोकसभा के नियमों में बताया गया है। नोटिस की अवधि 14 दिन की होती है और नोटिस केलिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए।
प्रस्ताव कैसे दिया जाता है?
अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा सदस्य पहले लोकसभा के सचिव-सामान्य (Secretary General) को लिखित सूचना देता है। इस पत्र में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव स्पष्ट लिखा जाता है। फिर जब यह प्रस्ताव सदन में रखा जाता है तो नोटिस में लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए, अगर इससे कम सदस्यों का समर्थन होता है तो वह प्रस्ताव रद्द हो जाता है।





