रायगढ़ (विश्व परिवार)। जिले के खरसिया क्षेत्र में स्थित बानीपाथर के मंगल कार्बन प्लांट में 5 फरवरी को हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। 9 माह की मासूम भूमि खडिय़ा की 9 फरवरी को मौत के बाद 11 फरवरी को उसके पिता शिव खडिय़ा (27 वर्ष), साहेब लाल खडिय़ा (45 वर्ष) और इंदीवर (19 वर्ष) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है।
नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन, प्रशासन से तीखी नोकझोंक
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने शवों को नेशनल हाईवे पर रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पर्याप्त मुआवजा और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर रास्ता खुलवाने का प्रयास किया।
मुआवजे पर असंतोष
कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 12-12 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन परिजन इसे नाकाफी बता रहे हैं। उनकी मांग है कि प्रत्येक मृतक के बदले कम से कम 50 लाख रुपये दिए जाएं। साथ ही परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी और समुचित पुनर्वास पैकेज भी प्रदान किया जाए।
हादसे की वजह पर सवाल
बताया जा रहा है कि फर्नेस को बिना पूरी तरह ठंडा किए खोला गया, जिससे तेज आग और दबाव बाहर निकला और वहां काम कर रहे आठ मजदूर झुलस गए। आरोप है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। प्लांट में पुराने टायरों को पिघलाकर सडक़ निर्माण के लिए उपयोगी काला तेल तैयार किया जाता है।
घायलों की हालत नाजुक
हादसे में घायल अन्य मजदूरों का इलाज रायपुर के एक निजी बर्न सेंटर में चल रहा है। उदाशिनी खडिय़ा (25 वर्ष) 30-40 प्रतिशत, कौशल (25 वर्ष) 70-80 प्रतिशत और प्रिया (32 वर्ष) 70-80 प्रतिशत तक झुलस चुकी हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
FIR और जांच की मांग
मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से एफआईआर वापस लेने और बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। पीडि़त परिवारों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रमुख मांगें
प्रत्येक मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा
परिवार के एक सदस्य को स्थायी/सरकारी नौकरी
घायलों के इलाज का पूरा खर्च कंपनी से वसूला जाए
दबाव की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई
पीडि़त परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए
इस दर्दनाक हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार पीडि़त परिवारों को किस तरह न्याय दिलाती है।





