देशनई दिल्ली

10 ट्रेड यूनियनों के भारत बंद का मिला-जुला असर, कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित

  • देश में बैंकिंग सेवाओं पर असर नहीं

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। केंद्रीय श्रमिक संगठनों और किसान समूहों के आह्वान पर आज देशभर में भारत बंद के तहत व्यापक हड़ताल और प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। हम आपको बता दें कि श्रमिक संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर और किसान हितों के खिलाफ तथा बड़ी कंपनियों के पक्ष में हैं। इसी के विरोध में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच ने यह राष्ट्रव्यापी कदम उठाया है जिसे कई किसान संगठनों, छात्र समूहों और युवा संगठनों का भी समर्थन मिला है। आज हो रही हड़ताल के दौरान उठ रही मांगों में मुख्य जोर चार श्रम संहिताओं को रद्द करने, बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को वापस लेने, नए परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को रोकने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने पर है। साथ ही मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजना के लिए अधिक धन और मजबूत प्रावधान की मांग भी उठाई जा रही है। श्रमिक संगठनों ने जरूरी सामान, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम करने की भी मांग रखी है। हड़ताल के कारण कई जगह जनजीवन पर असर देखा गया। बैंकिंग, बीमा, डाक परिवहन, खनन, गैस पाइपलाइन और बिजली जैसे क्षेत्रों में आंशिक बाधा की आशंका पहले ही जताई गई थी।
हालांकि अस्पताल, आपात सेवाएं, निजी कार्यालय, मेट्रो सेवा और जरूरी आपूर्ति सेवाएं चालू है ताकि आम लोगों को बहुत अधिक कठिनाई न हो केिरल में हड़ताल का व्यापक असर दिखा है। राज्य में सरकारी बसें और अधिकतर निजी चसै सड़कों से गायब रहीं, जिससे कार्यालयों में उपस्थिति कम रही। राज्य सरकार ने पहले ही आदेश जारी कर कहा था कि बिना अनुमति अनुपस्थिति रहने पर उस दिन का वेतन काटा जा सकता है।
हड़ताल का उद्देश्य….
दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के पूरे सपोर्ट वाली इस हड़ताल का मकसद आज कई पॉलिसी का विरोध करना है, जिसमें चार लेबर कोड, प्राइवेटाइजेशन और कॉन्ट्रैक्ट पर रखने के तरीके, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025, महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) में बदलाव और प्रस्तावित सीड बिल शामिल है।

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