नई दिल्ली (विश्व परिवार)। जनगणना 2026 के पूर्व, “भारत में मृत्यु सूचना प्रणाली के सुदृढ़ीकरण” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन 10 से 11 फरवरी 2026 तक किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों एवं हितधारकों — एम्स नई दिल्ली, भारत के रजिस्ट्रार जनरल का कार्यालय, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI), MINERVA तथा UNSW सिडनी — द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य देशभर में मृत्यु संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता, कवरेज एवं उपयोगिता को सुदृढ़ करना था।
इस कार्यक्रम में प्रख्यात सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शिक्षाविद एवं चिकित्सा पेशेवर शामिल हुए, जिन्होंने मृत्यु निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाने, मृत्यु विज्ञान के क्षेत्र में प्रमुख अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
इस संगोष्ठी एवं तकनीकी चर्चाओं में एम्स रायपुर ने महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली भूमिका निभाई। एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने “मृत्यु सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण” विषयक सत्र की अध्यक्षता की तथा स्वास्थ्य योजना निर्माण एवं नीति-निर्माण के लिए साक्ष्य-आधारित निर्णयों को समर्थन देने हेतु मृत्यु आंकड़ों की सटीकता, पूर्णता एवं विश्वसनीयता में सुधार के संबंध में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
उनके नेतृत्व में, एम्स रायपुर ने वर्ष 2025 के दौरान आईसीएमआर–एनसीडीआईआर, बेंगलुरु के सहयोग से मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज-ऑफ-डेथ (MCCD) ऑडिट की एक महत्वपूर्ण पहल लागू की है। इसके अतिरिक्त, संस्थान द्वारा ई-मॉर्टेलिटी सॉफ्टवेयर प्रणाली का सफल विकास एवं क्रियान्वयन किया गया है, जिसका उद्देश्य अस्पताल-आधारित मृत्यु कारण प्रमाणन को सुदृढ़ करना तथा सशक्त एवं रियल-टाइम मृत्यु सांख्यिकी उपलब्ध कराना है। एम्स रायपुर की डीन (अनुसंधान), डॉ. अभिरुचि गहलोतरा, ने तकनीकी सत्र में पैनल सदस्य के रूप में भाग लिया। यह सत्र भारतभर में उच्च गुणवत्ता वाली MCCD प्रक्रियाओं के सार्वभौमिक क्रियान्वयन हेतु प्रारूप ढांचे पर केंद्रित था, जिसमें निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के समावेशन एवं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम से समन्वय पर विशेष बल दिया गया। चर्चा के दौरान मानकीकरण, क्षमता निर्माण, डिजिटल एकीकरण तथा देशव्यापी गुणवत्ता आश्वासन पर विशेष जोर दिया गया।
फैकल्टी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए, डॉ. स्वप्निल अखाड़े, एम्स रायपुर, ने “एम्स रायपुर में ई-MOR (इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ) सॉफ्टवेयर के कार्यान्वयन का ऑडिट एवं विश्लेषण” विषय पर मौखिक प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में मृत्यु रिपोर्टिंग के डिजिटलीकरण से संबंधित व्यावहारिक अनुभव, चुनौतियां, श्रेष्ठ प्रथाएं तथा मापनीय परिणामों को साझा किया गया, जिससे एम्स रायपुर को इलेक्ट्रॉनिक मृत्यु निगरानी प्रणाली अपनाने वाले एक आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित किया गया। संगोष्ठी ने जनसंख्या स्वास्थ्य रुझानों की निगरानी, रोग भार की पहचान तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने में मजबूत मृत्यु सूचना प्रणाली की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। एम्स रायपुर के सक्रिय नेतृत्व, नवाचारपूर्ण पहलों एवं तकनीकी योगदान की व्यापक सराहना की गई, जिससे संस्थान की सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य प्रगति एवं राष्ट्रीय क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पुनः
सुदृढ़ हुई।





