रायपुर (विश्व परिवार)। एम्स रायपुर के जैव रसायन विभाग द्वारा 12–14 फरवरी 2026 के दौरान सेंट्रल ज़ोनल एसीबीआईकॉन् (CZACBICON 2026) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। सम्मेलन की थीम “Molecular Insights Driving Clinical Innovation” रही, जिसमें प्रयोगशाला अनुसंधान को रोगी देखभाल से जोड़ने में अनुवादात्मक अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया गया। 12 फरवरी को विभागीय संकाय सदस्यों—डॉ. रचिता नंदा, डॉ. सुप्रवा पटेल, डॉ. सीमा शाह, डॉ. डी.एल. गुप्ता, डॉ. नेहा रानी वर्मा एवं डॉ. विभा साखरे—द्वारा एक हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों—डॉ. बी.सी. कोनर, डॉ. उमा कंगा, डॉ. कल्याण गोस्वामी एवं डॉ. सुखेश मुखर्जी—ने प्लेनरी व्याख्यान प्रस्तुत किए। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से आए युवा शोधकर्ताओं और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भी मौखिक एवं पुरस्कार शोध-पत्र प्रस्तुतियों के माध्यम से सक्रिय भागीदारी निभाई।
मुख्य अतिथि प्रो. पी.के. पात्रा, कुलपति, पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने सहयोगात्मक अनुसंधान और स्वदेशी उत्पादों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो. राजीव रंजन सिन्हा, महासचिव, एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल बायोकेमिस्ट्स ऑफ इंडिया ने एसीबीआई की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला तथा आगामी IFCC वर्ल्ड लैब में सहभागिता हेतु आमंत्रित किया।
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने विभाग को एनएबीएल मान्यता प्राप्त करने पर बधाई दी तथा उसके अनुसंधान योगदान की सराहना की। डीन (शैक्षणिक) एवं आयोजन अध्यक्ष प्रो. एली महापात्रा ने समुदायोन्मुख और समावेशी अनुसंधान की प्रतिबद्धता दोहराई।
तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन वैलिडिक्टरी सत्र एवं पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसने सेंट्रल ज़ोन में आणविक अनुसंधान एवं नैदानिक नवाचार को नई दिशा प्रदान की।





