आत्महत्या संकट का समाधान नहीं, पुरुषार्थ करो फल भाग्य से ही मिलेगा : आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज

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रायपुर (विश्व परिवार)। गायत्री मंदिर समता कॉलोनी में सोमवार को ससंघ विराजित आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि हमेशा पुरुषार्थ करना चाहिए, जो भी आपको मिला है भाग्य से ही मिला है, इसलिए रोने की जरूरत नहीं है। निराश होकर नदी नाले में कूदने मत जाना,आत्महत्या करने मत चले जाना। घर में जरा कष्ट होने लग जाए तो कर्म विपाक मानकर सहन करना लेकिन आत्महत्या करके मनुष्य पर्याय का नाश मत करना, कितनी भी विपत्ति आ जाए आत्महत्या मत करना। समता कॉलोनी में रहकर इतनी समता नहीं सीख पाए तो फिर  जिस कॉलोनी के नाम में ही समता है,तो फिर यहां रहने का क्या मतलब। 

आचार्यश्री ने कहा कि आत्महत्या करना कोई विपत्ति से दूर होने का मार्ग रही है,कोई संकट दूर करने का उपाय नहीं है। किसी व्यक्ति ने फांसी लगा भी ली,आत्महत्या कर ली लेकिन कर्म का बंध उसके पास ही था,वह जिस भी पर्याय में जाएगा कर्म का बंध वहीं उसको सताएगा। इसलिए आत्महत्या किसी भी पाप व अपराध का प्रायश्चित नहीं है।आचार्यश्री ने धर्मसभा में बैठे सभी लोगों से आत्महत्या जैसा घातक कदम नहीं उठाने का संकल्प करवाया।

आचार्यश्री ने कहा कि मृत्यु से नहीं पापों से डरो,यही आज का सूत्र है। जब टीवी के चित्रों को देखकर आदमी प्रभावित होने लगता है, तो चारित्र की मूर्ति को देख कर मन में आनंद न आए,तो फिर चारित्र का स्वरूप क्या ? भगवान जिनेंद्र के वचन अमृतभूत हैं। जैसे मेले में यदि मां की अंगुली पकड़े हो तो डर नहीं लगता है और यदि मां की अंगुली छूट जाए तो रोना प्रारंभ हो जाता है। ऐसे ही धर्म रूपी मां की अंगुली पकड़े हो तो किसी भी संकट में कोई डर नहीं और कहीं धर्म अंगुली छूट गई तो कहीं भी सुरक्षित नहीं हो रह पाओगे।

आचार्यश्री ने कहा कि आप कितने भाग्यवान हो कि इस कोरोना महामारी के काल में भी बच गए, इसलिए सभी धर्म करो। महामारी के काल में मंदिर तक आने में भी लोग घबरा रहे थे,इसलिए कितनी भी विपत्ति आ जाए धर्म का सहारा मत छोड़ना। धर्म की शरण में आओगे तो सुगति के मार्ग को पकड़ लोगे,फिर मृत्यु से डर नहीं लगेगा। मृत्यु से वे डरे जिन्हें आत्मा के अमरत्व का,जिनवाणी की शरण का बोध नहीं। जिन्हें इसका बोध है उन्हें मृत्यु से डरने की आवश्यकता नहीं, इसलिए आज ही निर्णय करो मृत्यु से कभी नहीं डरोगे,हमेशा 5 पापों से डरोगे।

धर्मसभा में पूर्व मंत्री राजेश मूणत,नरेंद्र जैन गुरुकृपा,पारस पापड़ीवाल,प्रदीप जैन विश्वपरिवार,प्रदीप पाटनी अध्यक्ष विशुद्ध वर्षा योग समिति,ललित पटवा,सुधीर बाकलीवाल,सुमीत गंगवाल,बंटी जैन,सूरजमल जी सुमीत बाकलीवाल, राजकुमार बाकलीवाल, सुमीत पांड्या, रितेश बाकलीवाल मुख्य रूप से उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन राजेश जैन रज्जन ने किया। आचार्यश्री का आहार कराने का सौभाग्य सूरजमल जी सुमीत कुमार बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

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