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कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा भिलाई–3 परिवार न्यायालय में “डिजिटल डेटा से विधिक मान्यता तक”: डिजिटल साक्ष्य एवं उसकी ग्राह्यता पर संगोष्ठी का आयोजन

रायपुर (विश्व परिवार)। कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा 19 फरवरी 2026 को भिलाई–3 स्थित परिवार न्यायालय में “साइबर विधि तथा डिजिटल साक्ष्य: न्यायालयों में ग्राह्यता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अधिवक्ता संघ, भिलाई–3 (छत्तीसगढ़) के समन्वय से संपन्न हुआ, जिसने औपचारिक समर्थन प्रदान करते हुए न्यायालय परिसर में संगोष्ठी के सफल आयोजन में सहयोग किया।
इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में कार्यरत अधिवक्ताओं ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेख अरसफ, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भूपेश कुमार बसंत तथा प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अभिनव दहेरिया की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे विधि समुदाय का सशक्त संस्थागत समर्थन परिलक्षित हुआ।
सत्र का संचालन विधि संकाय की सहायक प्राध्यापिका हरलीन कौर द्वारा किया गया, जिन्होंने साइबर विधि की विधिक समझ को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने डिजिटल अपराधों, साइबर विनियमों तथा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के साक्ष्यात्मक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, साइबर अपराधों से संबंधित विधिक ढांचे तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता और साइबर संबंधी विवादों में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित वैधानिक अनुपालन, प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों तथा न्यायिक मानकों पर विशेष जोर दिया गया।
परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों, विशेष न्यायाधीशों, अपर सत्र न्यायाधीशों तथा सिविल न्यायाधीशों सहित वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति ने उभरते विधिक क्षेत्रों में व्यावसायिक उन्नयन के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
कलिंगा विश्वविद्यालय निरंतर शैक्षणिक–न्यायिक पहलों का आयोजन करता रहा है और अकादमिक जगत तथा न्यायपालिका के मध्य सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु प्रतिबद्ध है। विधि समुदाय से प्राप्त उत्साहजनक प्रतिक्रिया के आधार पर विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला न्यायालयों में ऐसे संरचित एवं विषय-आधारित कार्यक्रमों का विस्तार करने का संकल्प व्यक्त किया है, जिससे विधि शिक्षा और न्यायिक व्यवहार के मध्य समन्वय को और अधिक सशक्त किया जा सके।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा न्याय वितरण प्रणाली में क्षमता-विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पुनः अभिव्यक्त की गई।

 

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