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कलिंगा विश्वविद्यालय में अगस्त्य मुनि के एक भारत श्रेष्ठ भारत के विजन पर सेमिनार का सफलतापूर्वक आयोजन सम्प्पन

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रायपुर (विश्व परिवार)। विकसित भारत 2047 के उद्देश्यों के अनुरूप एक भारत श्रेष्ठ भारत पर केंद्रित, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय सेमिनार, कलिंगा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर में आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तमिलनाडु से आमंत्रित वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परशुराम थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जगरानी देवी ग्रुप ऑफ कॉलेज के निदेशक डॉ. बृज भूषण द्विवेदी थे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई। कलिंगा विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय के प्रोफेसर तथा कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ए. राजशेखर ने विकसित भारत 2047 के महत्व पर प्रकाश डाला तथा दक्षिण भारत के प्रमुख ऋषि माने जाने वाले अगस्त्य मुनि के दर्शन और योगदान पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती जे वसंत लक्ष्मी ने वीणा (एक प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय संगीत वाद्ययंत्र) पर सुन्दर प्रस्तुति दी तथा श्री बी शरद ने तबले पर दक्षिण भारत की एक मनोरम प्राचीन काव्य श्रृंखला प्रस्तुत की। भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम छात्रा सुश्री अनंत कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
विषय विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परशुराम ने आजादी से पहले और बाद में राष्ट्र के विकास में तमिल राज्य की भूमिका तथा कृषि से लेकर विज्ञान और प्रशासन तक तमिल राज्य के लोगों की भागीदारी, उनके समर्पण और उनके कार्यों को एक भारत श्रेष्ठ भारत से जोड़ते हुए विस्तार से बताया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 250 से अधिक आमंत्रित शिक्षाविद, प्रोफेसर, छात्र तथा अन्य संकाय सदस्य शामिल हुए।
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर श्रीधर ने भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को विकसित भारत, एक भारत श्रेष्ठ भारत की उपयोगिता और इसके कार्यान्वयन पर दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने उदाहरण देकर विषय की प्रासंगिकता को भी समझाया कि 2047 में भारत के नागरिकों द्वारा यह सपना कैसे पूरा किया जाएगा।
डॉ. बृज भूषण द्विवेदी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि हम एक भारत श्रेष्ठ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कैसे मिलकर काम कर सकते हैं और आने वाले वर्षों में भारत को एक महान देश बनाने में हम सभी कैसे अपनी भूमिका निभा सकते हैं। अतिथि वक्ताओं में डॉ. ई.वी. राघव ने दक्षिण भारत की विभिन्न भाषाओं और इसकी सांस्कृतिक विरासत के बारे में अपने विचार व्यक्त किए, डॉ. आर. जय कुमार ने संस्कृति की उत्पत्ति और विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने तमिल भाषा के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. कालीदोस ने तमिलनाडु के प्राचीन साहित्य, जीवन शैली, विचार और आध्यात्मिकता पर भी प्रकाश डाला। डॉ. आर. उदयकुमार ने संस्कृति के सबसे प्रिय पिता अगस्त्य मुनि के योगदान और पहल पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को तमिल की सुंदर परंपरा से परिचित कराया।
कार्यक्रम के समापन पर भारतीय भाषा समिति के पर्यवेक्षक श्री सुधांशु द्विवेदी ने केंद्र सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न परियोजनाओं, संगोष्ठियों और एक भारत श्रेष्ठ भारत जैसे विचारों पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का समापन कलिंगा विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर श्रीमती एल. ज्योति रेड्डी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी प्रतिभागियों और योगदानकर्ताओं के प्रति उनके बहुमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

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