(विश्व परिवार) जीवन में मित्र सभी के होते हैं लेकिन महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा की जोड़ी ने पिछले 15 वर्षों की दोस्ती में मानव सेवा , मूक पशु पक्षियों की सेवा , दिव्यांग भाई बहनों की मदद , कटे फ़टे होंठ के बच्चों की सर्ज़री , वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण , बुजुर्गों की परवाह , सामाजिक कुरीतियों में बदलाव जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर मित्रता को नया आयाम दिया है ।
मानव सेवा माधव सेवा को आत्मसात करते हुए , पिछले 15 वर्षों में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग , पोलियोग्रस्त बच्चों को कैलिपर्स , वैसाखी , ट्रायसिकल , व्हीलचेयर इत्यादि वितरण कर 50000 भाई बहनों को लाभान्वित किया गया है ।
हम सभी जीवनभर सुनते बोलते हैं लेकिन वृद्धावस्था में सुनाई कम देने लगता है और घर से सदस्य इस बात को नजरअंदाज करते हैं तब बुजुर्गों की समस्या आरम्भ होती है । महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने इसको महत्वपूर्ण समस्या मानते हुए 10000 से ज़्यादा कान की मशीन का अबतक वितरण किया है ।
श्रवण यन्त्र वितरण में किसी औपचारिकता की जगह नही रखी न आधार कार्ड मांगा व ओड़ियोमेट्री जांच रिपोर्ट ली , न आय प्रमाण पत्र न राशन कार्ड कुछ भी नही मांगा केवल बुजुर्ग ने कॉल किया हमने उसे आने का स्थान व समय बताया और श्रवण यन्त्र दे दिया ।
बच्चों के कटे फ़टे होंठ चेहरे की सुंदरता बिगाड़ देते हैं साथ ही खाने बोलने आदि में समस्या होती हैं । तालु में छिद्र से परेशानी होती है । ऐसे हजारों बच्चों का पिछले 20 वर्षों में डॉ सुनील कालड़ा के नर्सिंग होम में ऑपरेशन करवाया है । ऑपरेशन के बाद बच्चों के विकृत चेहरे तो सुंदर होते ही है साथ ही जो हीन भावना घर कर जाती है उसे भी दूर किया जाता है ।
तपती धूप में बच्चों के पैरों में न पड़े छाले इस बात को ध्यान में रखते हुए विगत कई वर्षों से मार्च माह में स्कूली छात्रों को जूतों का वितरण किया गया है । प्राथमिक विद्यालय में जाकर सैकड़ों छात्र छात्राओं को उनके नाप अनुसार जूते प्रदान किए ताकि तपती गर्मी में राहत मिल सके ।
करोनाकाल की लहर में ऑक्सीजन कनसनट्रेटर व ऑक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से 1500 से ज्यादा मरीजों को लाभान्वित किया गया । करोना की भयावह दूसरी लहर में भी सक्रियता से ऑक्सीजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई ।
करोना के बाद के वर्षों में अचानक बी पी बढ़ने से अनेकों मौत होने लगी , शुगर के मरीजों में यह शिकायत दर्ज की गई । सामान्यतः घरों में बी पी मापने की मशीन नही होती है जिससे समय पर प्रारंभिक इलाज भी नही मिल पाता है । आकस्मिक मौत की घटनाओं के मद्देनजर साधर्मिक घरों व सर्वसमाज के लोगों के बीच अभी तक 4000 नग से ज्यादा बी पी शुगर की जांच के इक्यूपमेंट बांटे गए ।
स्वाभिमान से स्वावलंबन तक के अंतर्गत साधर्मिक भाई बहनों को स्वरोजगार को आगे बढ़ाने के लिए मदद की गई । जैन समाज में मृत्यु उपरांत होने वाले कार्यक्रमों के लिए गाइडलाइन जारी कर आदर्श प्रस्तुत किया है ।
पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाए गए । लोगों को बीज छिड़काव की प्रेरणा दी गई । प्रेरित होकर जैन भाइयों ने जंगल व शहर के बाहरी रास्तों में खाली भूमि पर उपयोगी बीजों का बड़ी मात्रा में छिड़काव किया ।
बच्चों के लिए मोटिवेशनल कार्यक्रम आयोजित किया गया । मोबाईल फास्टिंग की शपथ जैसे नियमों से बच्चों को जीवन निर्माण का मार्गदर्शन दिया गया । परीक्षा के लिए उपयोगी टिप्स देने अभियान चलाया गया । शिक्षिकाओं को बच्चों के जीवन निर्माण के लिए प्रेरित करने अनेक मार्ग बताए गए । गर्मियों के अवकाश में बच्चों को अपने बुजुर्गों के साथ संवाद कर उनके अनुभव साझा करने प्रेरित किया गया ।





