रायपुर (विश्व परिवार)। राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के चौरसिया कॉलोनी में साल 2013 में हुए चर्चित गोलीकांड मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज शर्मा की कोर्ट ने वीरेंद्र सिंह उर्फ रुबी सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित नहीं कर सका।
जानकारी के अनुसार, फर्नीचर व्यवसायी मोहम्मद हबीब खान को वीरेंद्र सिंह ने अपनी बहन की शादी के लिए करीब 48 हजार रुपए का फर्नीचर बनाने का ऑर्डर दिया था। इसमें से 5 हजार रुपए एडवांस दिए गए थे, जबकि 43 हजार रुपए बाकी थे। फर्नीचर देने के बाद भी जब पैसे नहीं मिले, तो दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
सामान वापस लेने पहुंचे, विवाद में चली गोली
13 अगस्त 2013 को हबीब खान अपने साथियों के साथ फर्नीचर वापस लेने वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई।
अभियोजन के अनुसार, वीरेंद्र ने पिस्टल से हबीब खान पर फायर किया, लेकिन गोली उन्हें नहीं लगी। इसके बाद पीछे खड़े नौसाद आलम उर्फ असलम को गोली लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
जांच के बाद मामला पहुंचा ट्रायल में
घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मौके से सबूत जुटाए गए, गवाहों के बयान लिए गए और आरोपी के पास से पिस्टल बरामद की गई। हथियार को जांच के लिए लैब भेजा गया और सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद मामला कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान और अन्य सबूत मजबूत नहीं हैं। अभियोजन पक्ष आरोपों को पूरी तरह साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए वीरेंद्र तोमर को सभी धाराओं से बरी कर दिया।
वकील ने बताया- केस में साक्ष्य कमजोर थे
वीरेंद्र की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने बताया कि केस में पेश किए गए सबूत अदालत में टिक नहीं पाए। कोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद यह पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा, जिसके चलते वीरेंद्र तोमर को दोषमुक्त करार दिया गया।





