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विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण): वीबी–जी राम जी (विकसित भारत-जी राम जी) अधिनियम, 2025

(विश्व परिवार)। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का उद्देश्य मजदूरी आधारित रोजगार को सतत विकास तथा विकसित भारत @2047 के विजन के साथ जोड़ते हुए ग्रामीण रोजगार ढांचे (फ्रेमवर्क) में परिवर्तन लाना है। यह अधिनियम सभी ग्रामीण परिवारों के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करता है।

यह ढांचा परिणामोन्मुख कार्यों तथा डिजिटल रूप से एकीकृत योजना के माध्यम से जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को प्राथमिकता देता है। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-रेफरेंसिंग, डिजिटल निगरानी तथा समयबद्ध मजदूरी भुगतान के माध्यम से तकनीक-सक्षम प्रशासन (गवर्नेंस) का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

अनिवार्य सोशल ऑडिट, संरचित निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली इसके क्रियान्वयन को और सशक्त बनाते हैं। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत ग्राम विकास और स्थायी परिसंपत्ति निर्माण के एक उत्पादक प्रेरक के रूप में स्थापित करता है।

देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐतिहासिक क्रियान्वयन

भारत सरकार ने इस अधिनियम को 01/07/2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

इसके लागू होते ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा), 2005 समाप्त हो जाएगा।

यह ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप एक समेकित, भविष्य उन्मुख और उत्पादकता आधारित ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है।

पृष्ठभूमि और सुधार की आवश्यकता

कई दशकों से मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रम ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

समय के साथ:

  • सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
  • डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार
  • वित्तीय समावेशन
  • आजीविका के नए अवसर

इन बदलावों के कारण रोजगार ढांचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।

रोजगार गारंटी में वृद्धि

  • पहले: 100 दिन
  • अब: 125 दिन प्रति वर्ष

इसका उद्देश्य:

  • आय बढ़ाना
  • रोजगार अवसर बढ़ाना
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना

श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था

यह अधिनियम “रोजगार भी, सम्मान भी” के सिद्धांत पर आधारित है।

  • श्रमिकों को स्थायी परिसंपत्ति निर्माण में भागीदारी
  • रोजगार के साथ विकास में योगदान

ट्रांजिशन व्यवस्था

  • पुराने जॉब कार्ड मान्य रहेंगे
  • ई-केवाईसी लंबित होने पर भी रोजगार मिलेगा
  • चल रहे कार्य जारी रहेंगे

मजदूरी भुगतान प्रणाली

  • DBT के माध्यम से भुगतान
  • अधिकतम 15 दिन के भीतर भुगतान
  • देरी पर 0.05% प्रतिदिन मुआवजा

बेरोजगारी भत्ता

यदि रोजगार नहीं मिला:

  • पहले 30 दिन: 1/4 मजदूरी
  • उसके बाद: 1/2 मजदूरी

बजट प्रावधान

  • केंद्र: ₹95,692.31 करोड़
  • कुल अनुमान: ₹1.51 लाख करोड़+

प्रशासनिक सुधार

  • प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9%
  • फील्ड स्टाफ की क्षमता बढ़ाई जाएगी

कार्य क्षेत्र (थीमैटिक एरिया)

1. जल सुरक्षा

  • जल संरक्षण
  • सिंचाई
  • भूजल पुनर्भरण

2. ग्रामीण अवसंरचना

  • सड़क
  • स्कूल
  • स्वच्छता
  • ऊर्जा

3. आजीविका विकास

  • बाजार
  • स्टोरेज
  • पशुपालन
  • कौशल विकास

4. जलवायु और आपदा प्रबंधन

  • बाढ़ नियंत्रण
  • पुनर्वास
  • वनाग्नि प्रबंधन

कृषि सीजन प्रावधान

  • 60 दिन “विराम अवधि” घोषित की जा सकती है
  • कृषि कार्य प्रभावित न हों

ग्राम पंचायत योजना

  • VGPP (विकसित ग्राम पंचायत योजना)
  • Bottom-up प्लानिंग
  • डिजिटल और GIS आधारित योजना

कार्यस्थल सुविधाएं

  • पेयजल
  • छाया
  • प्राथमिक उपचार

महिलाओं के लिए:

  • बच्चों की देखभाल सुविधा

सुरक्षा प्रावधान

  • दुर्घटना पर मुफ्त इलाज
  • मृत्यु/विकलांगता पर सहायता

पारदर्शिता व्यवस्था

  • जनता बोर्ड
  • सोशल ऑडिट
  • जियो टैगिंग
  • डिजिटल निगरानी

विशेष छूट

आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार विशेष छूट दे सकती है।

प्रमुख वैधानिक बिंदु

  • 125 दिन रोजगार की गारंटी
  • मजदूरी दर केंद्र तय करेगा
  • राज्यों को 6 माह में योजना बनानी होगी
  • केंद्र-राज्य संयुक्त योजना

निष्कर्ष

यह अधिनियम केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि
ग्रामीण विकास का एक आधुनिक, तकनीक आधारित और समेकित मॉडल है

जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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