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स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा, दो आरक्षक समेत 19 आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में पुलिस की जांच में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों समेत 17 आरोपी की गिरफ्तारी की जा चुकी है. इस घोटाले की जांच में हीरा खांडे गिरोह का नाम सामने आया है. गिरोह को सूचना पहुंचाने वाले सिम्स पुलिस चौकी पदस्थ आरक्षक रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर को गिरफ्तार किया गया है।
ऐसे कैसे काम करता था गैंग?
सिम्स अस्पताल से तहसील तक फैले इस नेटवर्क के खुलासे का सिलसिला जारी है. पुलिस जांच में पता चला कि अस्पताल में शव पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर को सूचना देते थे. इसके बाद गिरोह का सगरना और उसके अन्य सहयोगी सक्रिय हो जाते थे. वह परिजनों को पैसों और सरकारी मुआवजे का झांसा देकर मौत को सर्पदंश बताने के लिए तैयार करते थे. सामान्य बीमारी, कैंसर, आत्महत्या और दूसरी वजहों से हुई मौतों को कागजों में सांप के काटने से हुई मौत दिखाया जाता था. इसके बाद सरकार से मिलने वाली आपदा राशि का कुछ हिस्सा मृतकों के परिवार में बांट दी जाती थी।

अबतक 19 आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

1. महेंद्र कुमार मनहर, निवासी आशुतोष विहार, अशोक नगर

2. गोविंद विश्वकर्मा, निवासी दयालबंद

3. हीरा प्रसाद खाण्डेकर, निवासी आकाश विहार कॉलोनी

4. कुश कुमार गुप्ता, निवासी महाबीर सिटी, राजकिशोर नगर

5. भगत सिंह ठाकुर, मेन रोड बड़ी कोनी

6. शंकू सिंह ठाकुर, निवासी देव नगर कोनी

7. धर्मेन्द्र यादव

8. विजय जांगड़े

9. आकाश कुमार साहू

10. केशव कुमार कश्यप

11. कामता साहू (अधिवक्ता)

12. शिव कुमारी यादव

13. दामिनी यादव थाना तोरवा

14. सफीना बानो, निवासी लालखदान, महमंद

15. संतोष कुमार सूर्यवंशी, निवासी ग्राम महमंद

16 रंजीत कुमार चतुर्वेदी, निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सदा

17. सुनीता सोनवानी, निवासी ग्राम कुआं

18. आरक्षक रामकुमार पाटनवार

19. आरक्षक रामेश्वर भास्कर

फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाकर किया गया खेल
साल 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को स्नेक बाइट बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का पहला मामला सामने आया था. उस मामले में भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
स्नेक बाइट के फर्जी मामले में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर भी शामिल पाए गए हैं. पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया है।
लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ का प्रदर्शन
लिपिकों की गिरफ्तार के विरोध में सोमवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ सड़कों पर उतरा. प्रदर्शन में शामिल हुए कर्मचारियों ने कहा कि सर्पदंश से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सबसे पहले पुलिस पंचनामा तैयार करती है. इसके बाद चिकित्सक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरण तहसीलदार और एसडीएम के माध्यम से आगे बढ़ता है. अंतिम जांच और निर्णय लेने का अधिकार सक्षम राजस्व अधिकारियों के पास होता है. इस – मामले में एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय में पदस्थ लिपिक नरेंद्र कौशिक, हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से अब तक पूछताछ भी नहीं की गई है. उनकी मांग है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए।
विधानसभा में उठा था स्नेक बाइट मुआवजा मुद्दा
बता दें कि विधानसभा के मानसून सत्र में संर्प दंश बाइट मुआवजा का मुद्दा उठा था. जशपुर जिले में सर्पदंश से पिछले तीन वर्षों में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया. विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था. काफी हंगामे के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी।

 

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