रायपुर (विश्व परिवार)। सामाजिक उत्तरदायित्व एवं कर्मचारी कल्याण के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के प्राध्यापकों ने संस्थान के स्वच्छता एवं उद्यानिकी कर्मचारियों के लिए छाता वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।
यह सराहनीय पहल प्राध्यापकों के स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग से संभव हो सकी, जो परिसर की स्वच्छता, हरियाली तथा स्वस्थ वातावरण बनाए रखने में स्वच्छता एवं उद्यानिकी कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे समर्पित एवं निरंतर योगदान के प्रति उनके सामूहिक सम्मान एवं आभार का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. डी. सी. झारिया, प्रो. देबाशीष मिश्रा, प्रो. शारदा नंदन रॉ, प्रो. ईभा कोले, डॉ. मृदु साहू, प्रो. बिकेश कुमार सिंह, प्रो. नीरज विश्वकर्मा, प्रो. सूरज कुमार मुक्ति, डॉ. हिमांशु पोपतानी, प्रो. अमित राज सिंह तथा डॉ. नेहा गुप्ता ने उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग प्रदान किया। सफ़ाई और बागवानी विभाग के कुल 154 कर्मचारी और विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकों ने स्वच्छता एवं उद्यानिकी कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से छाते वितरित किए। यह पहल विशेष रूप से वर्षा ऋतु में उनके अथक परिश्रम, समर्पण तथा संस्थान के प्रति उनकी निरंतर सेवाओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से की गई। लाभार्थियों ने इस आत्मीय पहल के लिए सभी प्राध्यापकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा उनके कल्याण के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता और सहयोग की भावना की सराहना की।
इस अवसर पर प्राध्यापकों ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान की प्रगति और विकास में प्रत्येक सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सामाजिक एवं मानवीय पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाती है, बल्कि एनआईटी रायपुर परिवार में पारस्परिक सम्मान, संस्थागत सौहार्द तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करती है।
कार्यक्रम का समापन प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के बीच आत्मीय संवाद और शुभकामनाओं के साथ हुआ। इस अवसर ने एक समावेशी, संवेदनशील एवं सहयोगपूर्ण कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति एनआईटी रायपुर की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। छाता वितरण कार्यक्रम संस्थान के स्वच्छता एवं उद्यानिकी कर्मचारियों के अमूल्य योगदान के प्रति सामूहिक सम्मान, कृतज्ञता तथा मानवीय संवेदनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।







