देशनई दिल्ली

रक्षा क्षेत्र में MSME और स्टार्टअप को बढ़ावा, राजनाथ सिंह ने लॉन्च की नई नीतिगत पहल

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘VIMARSH’ DRDO-Industry Synergy Meet 2026 के दौरान MSME और डीप-टेक स्टार्टअप को रक्षा क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए कई नई नीतिगत पहलों की शुरुआत की। इन पहलों का उद्देश्य तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को कम करना, सीधे फंडिंग और इनक्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराना तथा DRDO की टेस्टिंग सुविधाओं तक उद्योगों की पहुंच आसान बनाना है।

इस अवसर पर DRDO की ओर से विकसित सॉफ्टवेयर के source code को लाइसेंस प्राप्त उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक सुरक्षित और मानकीकृत ढांचा भी लॉन्च किया गया। इससे software-defined defence capabilities को बढ़ाने और पुरानी तकनीकों के प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है।

13 विनिर्माण साझेदारों को 9 Technology Transfer समझौते

कार्यक्रम के दौरान Transfer of Technology (ToT) के लिए नौ Licensing Agreements को 13 manufacturing partners को सौंपा गया। इन समझौतों के जरिए अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा।

इसके अलावा Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Laghu Udyog Bharati (LUB) के साथ रणनीतिक MoUs का भी आदान-प्रदान किया गया। इनका उद्देश्य उद्योगों तक पहुंच बढ़ाना और जमीनी स्तर पर अधिक कंपनियों को रक्षा उत्पादन से जोड़ना है।

DRDO ने Quality Council of India के साथ System for Advance Manufacturing Assessment and Rating (SAMAR) Version 2.0 के लिए भी समझौता किया। इसके जरिए घरेलू रक्षा कंपनियों की manufacturing maturity को benchmark करने में मदद मिलेगी।

MSME और स्टार्टअप को रक्षा सप्लाई चेन में जोड़ने पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच सहयोग केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे research, design, testing, certification और manufacturing सहित पूरी value chain तक बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि DRDO के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है, स्टार्टअप innovation और agility लेकर आते हैं और युवा New India का सपना देखते हैं। इन सभी की ताकत को एक साथ जोड़ने से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि Viksit Bharat का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत भारत बनाना नहीं है, बल्कि देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को critical technologies में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी, indigenous content बढ़ाना होगा, defence exports में कई गुना वृद्धि करनी होगी और global supply chains में अपनी मजबूत मौजूदगी बनानी होगी।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक्स पर भी फोकस

रक्षा मंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए Positive Indigenisation Lists, Make in India, iDEX और ADITI जैसी पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रक्षा R&D बजट का 25 फीसदी हिस्सा private sector के लिए आवंटित करने का निर्णय भी लिया गया है।

उन्होंने कहा कि Technology Development Fund के जरिए स्टार्टअप को अनुदान दिया जा रहा है और कई तकनीकें उत्पादन के चरण तक पहुंच चुकी हैं। iDEX ने भी ऐसा रक्षा innovation ecosystem तैयार किया है, जहां स्टार्टअप वास्तविक operational requirements के आधार पर समाधान विकसित कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने MSME और स्टार्टअप को भारत में innovation का नया आधार बताते हुए कहा कि वे बड़े रक्षा सिस्टम के लिए components और sub-systems विकसित करने के साथ अत्याधुनिक तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं।

उन्होंने AI, quantum computing, hypersonics और directed energy जैसी भविष्य की तकनीकों में निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि drone technology, AI और cyber security जैसे क्षेत्रों में MSME और स्टार्टअप भारत की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

2,300 से ज्यादा Technology Transfers किए गए

रक्षा सचिव, Department of Defence R&D के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कहा कि VIMARSH 2026 को ‘Varta se Vikas’ थीम के तहत आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य commercial innovation को राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों के साथ जोड़ना और private sector की क्षमताओं को रक्षा ecosystem का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

उन्होंने बताया कि अब तक 2,300 से अधिक Technology Transfers (ToTs) 1,100 से ज्यादा उद्योगों को दिए जा चुके हैं। DRDO द्वारा विकसित करीब 50 मिसाइलों से संबंधित तकनीकें भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

कार्यक्रम के दौरान ‘Defence Systems for Resilient Bharat – Advancing Aatmanirbharta in Defence’ नामक पुस्तक भी जारी की गई। इसमें 2014 से 2026 के बीच DRDO के technology clusters द्वारा विकसित महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को शामिल किया गया है।

इसके साथ ही DRDO में Human Resource Outsourcing Service Contracts के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए गए। इनमें सेवा विनिर्देश तैयार करने, सेवा प्रदाताओं के चयन, contract administration, performance monitoring और कानूनी एवं संविदात्मक दायित्वों के पालन का ढांचा दिया गया है।

रक्षा तकनीक के लिए तकनीकी रोडमैप पर चर्चा

कार्यक्रम के Technical Sessions में DRDO के Technological Clusters के Directors General ने Aeronautical Systems, Missiles, Armaments, Microelectronics और Naval Systems के लिए तकनीकी रोडमैप प्रस्तुत किए।

DRDO मुख्यालय ने procedural compliance को आसान बनाने, facilities तक पहुंच तेजी से उपलब्ध कराने और licensing process को कम समय में पूरा करने से जुड़ी पहलों की जानकारी दी।

High-Level Panel Discussion में DRDO, Department of Defence Production और Defence Forces के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने technology absorption को तेज करने, Development-cum-Production Partner models को बेहतर बनाने और स्वदेशी तकनीकों को जल्द से जल्द सैन्य सेवा में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की।

VIMARSH 2026 में 250 से अधिक defence industry leaders, industry chambers के प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी और DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य DRDO की तकनीकी क्षमताओं, deep-tech startups और स्थापित manufacturing ecosystem के बीच सहयोग को मजबूत करना था।

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