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नेहा बोरा के बयान पर BJP का कांग्रेस से सवाल- हिंसक आंदोलन का समर्थन या लोकतांत्रिक विरोध?

रायपुर (विश्व परिवार)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी ने बांग्लादेश के आंदोलन को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताने संबंधी नेहा बोरा के बयान पर कांग्रेस से रुख स्पष्ट करने की मांग की है। श्री सोनी ने कहा कि विपक्ष को यह बताना होगा कि क्या वह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में विश्वास करता है या सत्ता विरोध के नाम पर अराजकता को उचित ठहराने की राजनीति करना?
भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री सोनी ने कटाक्ष किया कि देश, रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर करना चाहता है और राहुल के सहयोगी बांग्लादेश के हिंसक विचारों को भारत में स्थापित करना चाहते हैं। श्री सोनी तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के आंदोलन में आगे दिखाई दी नेहा बोरा द्वारा देश में बांग्लादेश का अराजकता मॉडल अपनाने की वकालत करना दुर्भाग्यपूर्ण है। राहुल गांधी लगातार लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन उनके साथ विरोध-प्रदर्शनों में लीड करने वाले लोग बांग्लादेश के आंदोलन को युवाओं के लिए रास्ता दिखाने वाला बताते हैं। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस विषय पर देश के सामने अपना स्पष्ट पक्ष रखे। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा अथवा संवैधानिक व्यवस्था को अस्थिर करने की किसी भी प्रवृत्ति का समर्थन नहीं किया जा सकता।
भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री सोनी ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम के दौरान हिंसा, व्यापक अशांति और अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमलों की खबरें सामने आई थीं। ऐसे घटनाक्रम को युवाओं के लिए आदर्श बताने से पहले उसके परिणामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता संविधान, चुनाव और जनता के जनादेश से होकर जाता है, न कि हिंसक टकराव और अव्यवस्था से। श्री सोनी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के संदर्भ में नेहा बोरा की टी-शर्ट पर बने प्रतीक और विभिन्न देशों में युवाओं के आंदोलनों के दौरान इस्तेमाल किए गए समान प्रतीकों को लेकर भी गम्भीर प्रश्न उठाये हैं। श्री सोनी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। विपक्ष का दायित्व केवल सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना भी है। राहुल गांधी को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी राजनीति संवैधानिक व्यवस्था के भीतर रचनात्मक विरोध की है या ऐसे आंदोलनों के समर्थन की, जिनके हिंसक परिणामों को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

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