सहसपुर (विश्व परिवार) शासकीय गजानंद माधव मुक्तिबोध महाविद्यालय, सहसपुर लोहारा में “ज्ञान-विज्ञान का संगम: प्राचीन दृष्टि और आधुनिक नवाचार का मिलन” विषय पर 17 एवं 18 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं विद्वानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और अपने शोध एवं विचारों का प्रभावी प्रस्तुतिकरण किया।
संगोष्ठी के प्रथम दिवस मुख्य अतिथि के रूप में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान अत्यंत समृद्ध एवं वैज्ञानिक आधारों पर स्थापित है, जिसे आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों के साथ समन्वित कर नए शोध आयाम विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं एवं शोधार्थियों को इस दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
द्वितीय दिवस के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय संचालक, उच्च शिक्षा दुर्ग संभाग, डॉ. अनुपमा अस्थाना उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने विस्तृत उद्बोधन में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज के समय में सतत विकास एवं नवाचार के लिए पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस प्रकार की संगोष्ठियों को ज्ञान-विनिमय का सशक्त माध्यम बताते हुए इसके आयोजन की सराहना की।
प्रमुख अतिथि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के अधिष्ठता डॉ. राजन यादव ने भी अपने संबोधन में प्राचीन एवं आधुनिक ज्ञान के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
प्रमुख अतिथि डॉ. जे. ए. धनश्याम, प्राचार्य कुकदुर महाविद्यालय, ने अपने वक्तव्य में ज्ञान-संगम की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट किया तथा शोध के क्षेत्र में नवाचार एवं अंतःविषय दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। वहीं
कवर्धा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ऋचा मिश्रा ने संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए इस आयोजन को शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. के. एस. परिहार ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने संगोष्ठी की भूमिका प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आधुनिक नवाचारों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा, विभिन्न सत्रों की विषय-वस्तु तथा प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रायपुर से आए श्री धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क विभाग, ने भी संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचीन ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय को समाज के समग्र विकास हेतु आवश्यक बताया।
तकनीकी सत्रों में डॉ. वीरेंद्र कुमार एवं डॉ. विजय साहू ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार रखे और विभिन्न शोध विषयों पर गहन चर्चा की। इसके अतिरिक्त, मॉरीशस से आए शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत कर संगोष्ठी को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आधुनिक नवाचारों से संबंधित विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। विद्वानों के बीच हुए विचार-विमर्श से शोध के नए आयाम उभरकर सामने आए तथा ज्ञान-विज्ञान के समेकित विकास हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक विज्ञान के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना तथा शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को एक सशक्त मंच प्रदान किया, जहां उन्होंने अपने विचारों एवं शोध निष्कर्षों को साझा किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रोफ़ेसर डॉ ए सी वर्मा , फुलसो राजेश पटेल ने भी अपने विचार रखे…
महाविद्यालय परिवार द्वारा संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु एक समिति बनाई जिसके संयोजक मोना बर्मन , सह संयोजक डॉ. खिलेश्वरी चंद्रवंशी कार्यकम कोडिनेटर डॉ ज्योति चंद्रवंशी जिनके प्रयास से ये कार्यक्रम अच्छे से सम्पन्न हुआ
मंच संचालन काजल साहू , आभा जोशी ने किया .. असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप सोनकर , अंजू महोबिया ,गौरव जायसवाल ,रूपेश वर्मा ,लक्ष्मीकांत वर्मा , विवेक चौहान , आशीष वर्मा गिरधारी वर्मा ,जे एल मरकाम , विनोद देवांगन, हेमंत चंद्रवंशी, अमित कुमार, कामनी चंद्रवंशी , जोधन पटेल ,कोमल वर्मा,भगत साहू, लव लस्कर दिलीप राम सहित समस्त स्टाफ के सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल, प्रभावी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।




