पारसोला(विश्व परिवार)। वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से वर्ष 2017 में दीक्षित 81 वर्षीय आर्यिका श्री ज्योतिमति माताजी ने दिनांक 6 दिसंबर 2024 को निर्यापकाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के समक्ष चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम सल्लेखना धारण कर ली है। इसके पूर्व आर्यिका माता जी दो उपवास के बाद केवल जल ही ग्रहण कर रही थी।आपकी संयम साधना निरंतर जारी है।
सामान्य परिचय
ब्रह्मचारी गजु भैया एवं राजेश पंचोलिया अनुसार श्रीमती नाथी बाई पति मांगीलाल जी जैन मालपुरा राजस्थान के यहां सन 1943 को श्रीमती मनोरमा बाई का जन्म हुआ आपके पति का नाम श्री चिरंजी लाल जी जैन था। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आर्यिका दीक्षा17 नवंबर 2007 को श्री श्रवण बेलगोला में ग्रहण की। निर्यापकाचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ समक्ष विगत दिनों संस्तरारोहण किया। आपकी संयम साधना अंतर्गत चारों प्रकार कीआहार सामग्री का त्याग 6 दिसंबर को पारसोला में निर्यापकाचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित संघ समक्ष किया है । लगभग एक माह पूर्व 81 वर्षीय आर्यिका माता जी ने अपने केशलोचन किए ।क्षपक साधु की यह विशेषता होती है कि उनके कक्ष में श्री जी को लाकर दर्शन करा कर अभिषेक दिखाया जाता है, उन्हें संबोधन करने के लिए आचार्य श्री ,अन्य मुनिराज और साधु उनके कक्ष में आते हैं और उन्हें संबोधित कर धर्म देशना देते हैं।