रायपुर/गुवाहाटी (विश्व परिवार)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा कांग्रेस नेताओं पर दायर ?500 करोड़ के मानहानि मुकदमे के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा है कि अदालत का दरवाज़ा खटखटाने से पहले मुख्यमंत्री को अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों का जवाब देना चाहिए था।
भूपेश बघेल ने कहा कि सांसद गौरव गोगोई द्वारा उठाया गया सवाल पूरी तरह जायज़ है। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या 12,000 बीघा जमीन पर अतिक्रमण हुआ है या नहीं। बघेल के मुताबिक, अगर मुख्यमंत्री निर्दोष हैं तो उन्हें मानहानि का केस करने के बजाय स्वतंत्र जांच समिति गठित कर अपनी और परिवार की संपत्तियों की जांच करानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह मुकदमा सच्चाई सामने आने के डर से दायर किया गया है और इसका मकसद विपक्ष को डराना है। उन्होंने कहा, अगर दामन पर दाग नहीं है तो जांच से क्यों घबराना? जनता के सामने सच्चाई लानी चाहिए।
दरअसल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कांग्रेस नेताओं—भूपेश बघेल, गौरव गोगोई और जितेंद्र सिंह—के खिलाफ सिविल और आपराधिक मानहानि का केस दायर कर ?500 करोड़ हर्जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनकी छवि खराब करने की साजिश रची।
वहीं कांग्रेस का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, अपराध नहीं। पार्टी का आरोप है कि सत्ता के दबाव में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले ने अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक टकराव को भी तेज कर दिया है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और गरमा सकता है।





