- सायंकाल हुई महानाट्य भरत का भारत की भव्य प्रस्तुति
- मोक्ष कल्याणक के साथ रविवार को होगा पांच दिवसीय महामहोत्सव का समापन
- रथयात्रा के बाद नव निर्मित वेदियों में विराजमान होगें जिन बिम्ब
- नवनिर्मित पद्मबल्लभ शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण होगा स्थापित
जयपुर /पदमपुरा (विश्व परिवार) श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में चल रहे नव निर्मित खड़गासन चौबीसी जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक एवं नव निर्मित पद्मबल्लभ शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण के पांच दिवसीय भव्य महा-महोत्सव के चौथे दिन शनिवार को केवल्य ज्ञान की क्रियाएं सम्पन्न हुई। वही समवशरण में तीर्थंकर को केवल ज्ञान प्राप्त होने के बाद उनकी दिव्य ध्वनि खिरी जिसका उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को लाभ मिला। सायंकाल आरती के बाद महानाट्य ” भरत का भारत ” का मंचन किया गया ।
वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य वर्धमानसागर महाराज, गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी एवं गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में रविवार को मोक्ष कल्याणक के साथ पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव का समापन होगा। इस मौके पर नवनिर्मित पद्मबल्लभ शिखर पर कलश व ध्वजारोहण तथा मंदिर परिसर में 111 फीट ऊचीं धर्म ध्वजा स्थापित की जाएगी।
अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन एवं महामंत्री हेमन्त सोगानी ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य पं. हंसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में केवल्य ज्ञान कल्याणक के तहत प्रातः 6.30 बजे से नित्य मह अभिषेक, शांतिधारा के बाद सौधर्म इन्द्र सुरेन्द्र – मृदुला पाण्डया के निर्देशन में भक्ति भाव से जिनार्चना की गई।
इस मौके पर आयोजित धर्म सभा में समाज श्रेष्ठीजनो द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन के बाद आचार्य वर्धमान सागर महाराज के पाद पक्षालन प्रकाश चन्द जैन चैन्नई द्वारा किये गए। मुनि प्रभव सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी एवं गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने केवल्य ज्ञान कल्याणक की क्रियाओं पर प्रकाश डाला। आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि समय के अनुकूल किया जाने वाला कार्य ही व्यक्ति को एक दिन समयसार बना देता है। तीन लोक के अधिपति के आगे सौधर्म इन्द्र, चक्रवर्ती आदि सब नतमस्तक होते हैं। तुम्हारा कमाना व्यर्थ, यदि तुमने निर्गन्थ दिगम्बर मुनिराजों को दान नहीं दिया हो। गुरु के चरणों में सदैव चेहरा खिला हुआ रहना चाहिए।
कमेटी की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत व सम्मान किया गया।
प्रचार संयोजक सुरेश सबलावत एवं विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि प्रातः 9.30 बजे तीर्थंकर महामुनि आदिनाथ चर्या के लिए नगर में घूमें। महामुनिराज की विधि बैठने के बाद इक्षु रस से राजा श्रेयांस ने प्रथम आहार दिया। प्रथम आहार चर्या देखने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
इसके बाद पंचाश्चर्य दृश्य दिखाए गए ।
प्रातः 10.30 बजे विमान शुद्धि कलश यात्रा निकली। मंदिर वेदी वास्तु पूजा के बाद हवन किया गया ।
मध्याह्न 2.00 बजे से केवल ज्ञान की सम्पूर्ण विधि की क्रियाएं की गई जिसमें अधिवासना, मुखोद्घाटन, नयनोन्मिलन, सूरिमंत्र, गुणानुरोपण, केवल्य ज्ञान पूजा, हवन पट्टोद्घाटन किया गया। आचार्य वर्धमान सागर महाराज द्वारा अपने संघस्थ मुनियों के साथ प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं पर अंकन्यास का अंकन किया गया। अंजनशलाका, स्वर्ण सौभाग्यवती द्वारा औषधि के बाद समवशरण रचना हुई।
इससे पूर्व बैण्ड बाजों के साथ मंदिर परिसर में चक्रवर्ती दिग्विजय जुलूस निकाला गया।
तत्पश्चात कलाकारों द्वारा कव्वाली की भव्य प्रस्तुति दी गई।
समवशरण का उदघाटन भारतीय दिगम्बर जैन महासभा दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष स्व. निर्मल सेठी के सुपुत्र धर्मेंद्र सेठी दिल्ली द्वारा किया गया। इस मौके पर दौसा सासंद मुरारी लाल मीणा एवं पूर्व विधायक वेद प्रकाश सोलंकी भी उपस्थित रहे।
समवशरण के प्रथम दर्शन एवं पूजा के बाद 46 दीपों से आरती का भी सेठी परिवार ने पुण्यार्जन किया । दिव्य ध्वनि खिलने के मौके पर समवशरण में विराजमान होकर गणधर के रुप में आचार्य वर्धमान सागर महाराज द्वारा दिव्य देशना दी गई । केवल ज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान ऋषभ देव समवशरण में उपस्थित होकर सभी प्राणियों को सदमार्ग बताने वाली दिव्य ध्वनि के द्वारा दिव्य देशना दी। भरत क्षेत्र मे मोक्ष मार्ग बंद हो गया। भगवान ऋषभ देव ने तीनों गति के जीवों के लिए मोक्ष मार्ग प्रदर्शित किया। मार्ग चलने पर सरल हो जाता है। मोक्ष मार्ग प्राप्त करने के लिए निर्गन्थ दीक्षा लेनी पडती है। धन दौलत सब त्याग कर संयम के पथ पर चलना पडता है। भगवान ऋषभ देव ने सबसे पहले मोक्ष मार्ग प्रदर्शित किया। श्रावक धर्म और मुनि धर्म अभी चल रहे हैं। जिसे ये दोनो धर्म प्राप्त हो जाते हैं वो मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो जाता है। मोह को जीतना सबसे कठिन है। मोह और राग द्वेष के कारण लोग संसार में परिभ्रमर कर रहे हैं।
इस मौके पर आचार्य श्री ने समवशरण में बैठे हुए जीवों, इन्द्र – इन्द्राणियो आदि की जिज्ञासा का समाधान किया ।
विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक सायंकाल 6.30 बजे से आरती के बाद शास्त्र सभा में शास्त्र वाचन किया गया । तत्पश्चात राजभवन में चक्रवर्ती का दरबार लगा। जिसमें धर्म चर्चा व राज्य के कल्याण की चर्चाएं की गई।
रात्रि में 8.00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें रंगशाला नाट्य अकादमी इन्दौर के कलाकारों द्वारा ” महानाट्य – भरत का भारत” की भव्य प्रस्तुति दी गई ।
महोत्सव समिति के संयोजक राज कुमार कोठ्यारी के मुताबिक रविवार 22 फरवरी को मोक्षकल्याणक के बाद नवनिर्मित खडगासन चौबीसी का पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं पद्मबल्लभ शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण महामहोत्सव का समापन होगा।
सुरेश सबलावत एवं विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक प्रातः मोक्ष कल्याणक क्रिया विधि के बाद निर्वाण लाडू चढाया जायेगा। अग्नि कुमार देवों का आगमन होगा। आचार्य श्री द्वारा जिनेश्वरी दीक्षा देने के बाद मंगल प्रवचन होगें। विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि इससे पूर्व आचार्य वर्धमान सागर महाराज द्वारा 121 वीं दीक्षा के रूप में जयपुर निवासी दीक्षार्थी मुन्ना लाल टकसाली को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। विश्व शांति महायज्ञ होगा।
रथयात्रा निकलेगी। प्रातः 11.00 बजे नवनिर्मित खडगासन चौबीसी प्रतिमाओं तथा नवीन वेदी में भगवान विराजमान के बाद अशोक – सुशीला, सुरेश – शांता एवं विमल – तारिका पाटनी आर के मार्बल्स परिवार द्वारा मूलनायक भगवान पद्मप्रभ के ऊपर मंदिर निर्माण के 75 साल बाद बने 108 फीट उतंग शिखर पर कलशारोहण,व ध्वज दण्डारोहण, ध्वजारोहण किया जाएगा । अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन एवं महामंत्री हेमन्त सोगानी ने बताया कि समाजश्रेष्ठी तारा चन्द पोल्याका, सुनील – नीलम, आकार-सोनाली, प्रकर्ष जैन द्वारा
मंदिर परिसर में 111 फीट की धर्म ध्वजा लगाई जायेगी।
रविवार को होगी जिनेश्वरी दीक्षा
विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक रविवार 22 फरवरी को वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागर महाराज द्वारा प्रातः 8.30 बजे मूर्ति कला कालोनी निवासी मुन्ना लाल टकसाली को सिद्ध हस्त कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी।
प्रदेश के पहले जैन मंदिर में पहली बार 111फीट ऊचीं लगेगी धर्म ध्वजा
उपाध्यक्ष सुरेश काला एवं महावीर अजमेरा के मुताबिक प्रदेश के पहले दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में पहली बार
111 फीट की धर्म ध्वजा लगाई जायेगी। धर्म ध्वजा समाजश्रेष्ठी तारा चन्द पोल्याका, सुनील – नीलम, आकार-सोनाली, प्रकर्ष जैन द्वारा स्थापित की जाएगी।





