- प्रशासन धाम सत्यापन के बाद कुछ कार्रवाई करने में खुद को पा रही है असमर्थ
सूरजपुर ब्यूरो ( विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में स्थित सावारवा धान खरीदी केंद्र से इस साल का सबसे बड़ा धान घोटाला की खबर सामने आया है।
बताया जा रहा है कि भैयाथान एसडीएम के नेतृत्व में एक सप्ताह पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने खरीदी केंद्र में जाकर खरीदे गए धान का भौतिक सत्यापन किया,, जिसमें सामने आये आंकड़े को देख अधिकारी भी असंभित रह गए,, इतनी सतत निगरानी के बावजूद इतना बड़ा धान घोटाला आखिर कैसे हो गया, प्रशासनिक तंत्र जांच में जुटी है।
भौतिक सत्यापन करने पश्चात एसडीएम भैयाथान चांदनी कंवर ने प्रतिवेदन कलेक्ट कार्यालय में जमा कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि धान खरीदी केंद्र संवारावा में इस वर्ष 164534 बोरी में 65813.60 क्विंटल धान खरीदा गया। जिसमें से मौके पर 82439 बोरी में 32975.60 क्विंटल धान भंडारित पाया गया।
सूत्रों के मुताबिक 82095 बोरी,यानी 32838 क्विंटल धान मौके से गायब है,,जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ 18 लाख बताई जा रही है
हालांकि आधिकारिक रूप से इस घोटाले की खबर सामने नहीं आई है
लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर मौजूद स्थानीय जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह द्वारा इस खबर को कुछ दिन पूर्व बाकायदा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे आंकड़ों के साथ जनता के बीच रखा गया था।
वहीं सत्यापन में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों से मौखिक तौर पर बात की गई तो उन्होंने भी जल्द जिला अधिकारियों के माध्यम से इस बात का खुलासा करने की बात कही है।
इस साल के धान खरीदी में इतनी कड़ाई बरतने व प्रशासन की सतत निगरानी के बावजूद खरीदी केंद्र के प्रबंधक के द्वारा इतना बड़ा घोटाला कैसे कर दिया गया, यह सबसे बड़ा सवाल है?
अब जरा इस बात को समझिए… इस वर्ष के भौतिक सत्यापन में मात्र 33 हजार क्विंटल धान मौके पर पाया गया..लेकिन खरीदे गए आंकड़े लगभग 66 हजार के आस पास है.. अब इसमें स्पष्ट यह होता है
कि गायब धान की खरीदी सिर्फ कागजों में हुई होगी… कई किसानों के खातों में थान की मात्रा चढ़ाकर रुपए आहरित कैसे किए गए .. कौन-कौन इस महा घोटाले शामिल है प्रशासन के सघन जांच के बाद ही इस बात का पता चल सकेगा।
ठीक इसी तरह,,इस
धान खरीदी केंद्र के पुराने आंकड़ों में पिछले वर्ष लगभग 70 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई थी… यानी पिछले साल भी यही किसान थे जिन्होंने धान बेचा और लगभग इस साल के सत्यापन में जो सामने आया है उसी के आसपास ही पिछले वर्ष खरीदे गए धान की मात्रा होगी..
अब जरा इस बात को समझिए
इस वर्ष में सत्यापन के दौरान मौके पर भंडारीत पाए गए धान के आस पास ही पिछले साल यानी लगभग 35 हजार क्विंटल धान की खरीदी हुई होगी … तो आंकड़ों के मुताबिक लगभग 70 हजार क्विंटल धान का खरीदा जाना. पूरी तरह संदेहास्पद माना जा सकता है… इतना बड़ा घोटाला सरकार को सीधे तौर पर चैलेंज करने जैसा है
इस महा फर्जीवाडे ने धान की काली कमाई का पोल खोल कर रख दिया है… चंद रुपयों के मासिक तनख्वाह में काम करने वाले प्रबंधक साल दर साल करोड़ पति आखिर इसी तरह किसानों को गुमराह कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाकर बन रहे हैं… महंगी महंगी गाड़ियां , आलीशान घर लाखों करोड़ों की जमीने और भी न जाने क्या-क्या ।
बहरहाल इस मामले में जिला प्रशासन कब तक जांच का खुलासा कर कार्रवाई करेगी.. इंतजार करना होगा।






