- ‘उपवास का अर्थ है स्वयं की आत्मा व ईश्वर के पास रहना, भाव पवित्र करना’
औरंगाबाद (विश्व परिवार)|शहर के दशहरा मैदान स्थित भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी टाउन हॉल में शनिवार को ‘हर मास एक उपवास’ अभियान के तहत चतुर्थ सामूहिक उपवास संकल्प कार्यक्रम हुआ। इसमें अंतरमना 108 तपाचार्य प्रसन्न सागर जी के सान्निध्य में 1 हजार से अधिक लोगों ने स्वस्थ जीवन और आत्मशुद्धि आ के लिए प्रतिमाह एक दिन उपवास करने का संकल्प लिया।
महाराजश्री ने कहा कि उपवास का अर्थ है आत्मा और ईश्वर के निकट रहना तथा भावों को पवित्र बनाना। उपवास से शरीर निरोग रहता है। तपस्या और उपवास की साधना के बिना आत्मकल्याण का मार्ग नहीं मिलता। कार्यक्रम का आयोजन दिगंबर जैन समाज नीमच और फास्टिक फाउंडेशन नीमच चैप्टर के तत्वावधान में किया गया। इस दौरान प्रवर्तक डॉ. सहज मुनि महाराज, उपाध्याय मुनि पियूष सागर जी महाराज और चतुर्विध संघ (17 पीछी) भी मंचासीन रहे। साथ ही निपानिया धाम आश्रम के महामंडलेश्वर गुरुदेव सुरेशानंद जी शास्त्री विशेष रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर स्वामी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से । हुई। इसके बाद नेगम सागर जी महाराज ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में टीवी स्टार कवि सुदीप भोला ने अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि विक्रम और देव कनेरिया (पिपलिया मंडी) ने नवकार मंत्र पर आधारित बांसुरी की मधुर धुन से वातावरण भक्तिमय बना दिया। संचालन अजय कासलीवाल और आंचल सेठी ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री द्वारा लिखित पुस्तकों से अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
तपाचार्य प्रसन्न सागरजी बोले: उपवास शरीर को निरोग बनाता है
तपाचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शरीर के साथ भावों की पवित्रता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज तक कोई जानवर मनुष्य नहीं बन पाया, लेकिन कई मनुष्य ऐसे कार्य करते हैं जो पशु समान होते हैं। जब शरीर शुद्ध होगा तो भाव पवित्र होंगे, भाव पवित्र होंगे तो विचार पवित्र होंगे और मन शुद्ध होगा। मन शुद्ध होगा तो आत्मा पवित्र होगी और आत्ममुक्ति का मार्ग सरल बनेगा। उन्होंने कहा कि भोजन को औषधि की तरह ग्रहण करना चाहिए। मनुष्य मरता है तो लाखों रुपए खर्च करवाता है, जबकि हाथी मरता है तो लाखों रुपए देकर जाता है। इसलिए स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए प्रतिमाह एक उपवास जरूरी है।
पाचन तंत्र मजबूत होता, मन को मिलता है संतुलन
उपाध्याय मुनि पियूष सागर जी महाराज ने कहा कि उपवास हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर के विकारों को बाहर निकालता है। इससे शरीर को नवजीवन मिलता है और अंगों को विश्राम भी मिलता है। प्रवर्तक डॉ. सहज मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य की संगत उसके जीवन को प्रभावित करती है। यदि हम आहार पर संयम रखें तो निरोगी जीवन संभव है। वहीं महामंडलेश्वर सुरेशानंद जी शास्त्री ने कहा कि उपवास के साथ संस्कारों का भी महत्व है। माता-पिता के दिए संस्कारों को आत्मसात करना ही सच्ची सेवा है।
अतिथियों ने भी रखे विचार कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश कुलदीप जैन, डॉ. ललित शास्त्री, डॉ. पंकज राय, निशि जैन, पूर्व मंत्री एवं विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, विधायक दिलीप सिंह परिहार, नपाध्यक्ष स्वाति चोपड़ा, संघपति दिलीप कुमार गोमड, दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष विजय कुमार विनायका व कई अतिथियों ने संबोधित किया।
टाउन हाल में हर मास एक उपवास के सम्मेलन में उपस्थित जन इनसेट संबोधित करते आचार्य श्री।
1 हजार से अधिक लोगों ने लिया उपवास का संकल्प कार्यक्रम में समाजसेवी संतोष चोपड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल, पतंजलि प्रदेश प्रभारी प्रेम पूनिया, स्वामी रामदेव जी महाराज के प्रवक्ता एवं कार्यक्रम संयोजक एस. के. तिजारा वाला (हरिद्वार), अंतरमना धार्मिक एवं पारमार्थिक न्यास के समन्वयक आकाश जैन, विजय कुमार विनायका, अजय कासलीवाल, जितेंद्र जैन, महेश कुमावत सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मौजूद 1 हजार से अधिक लोगों ने प्रतिमाह एक दिन उपवास रखने का संकल्प लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।






