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आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर ने स्थापना के मात्र आठ महीनों के भीतर पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण पूर्ण किए

रायपुर (विश्व परिवार)। आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मई 2025 में अस्पताल की स्थापना के मात्र आठ महीनों के भीतर पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण पूर्ण किए हैं।सभी प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहे हैं।डोनर एवं रेसपिएंट्स दोनों स्वस्थ हैं, प्रत्यारोपित किडनी सामान्य रूप से कार्य कर रही है तथा सभी मरीज नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ की निरंतर निगरानी एवं फॉलो-अप में हैं।
सभी किडनी प्रत्यारोपण लिविंग डोनर के माध्यम से किए गए, जिनमें डोनर मरीजों के निकट पारिवारिक सदस्य थे। इनमें पति–पत्नी एवं माता–पुत्र जैसे संबंध शामिल रहे, जो स्वैच्छिक अंगदान की भावना को दर्शाते हैं।चिकित्सा गोपनीयता मानकों के अनुरूप सभी डोनर एवं मरीजों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी गई है।
आई एल एस हॉस्पिटल्स के ग्रुप सी ओ ओ डॉ. विशाल गोयल ने कहा कि आई एल एस समूह की ट्रांसप्लांट सेवाएँ चार मूलस्तंभों—मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक तकनीक, उत्कृष्ट क्लिनिकल विशेषज्ञता और विश्वस्तरीय उपचार परिणाम—पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर पूरी तरह से पेशेंट सेंट्रिक देखभाल के मार्ग पर अग्रसर है और कम समय में ही शहर के लोगों का विश्वास अर्जित कर चुका है। मई 2025 में प्रारंभ हुआ आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर, पैन-इंडिया स्तर पर आईएलएस समूह का पाँचवाँ अस्पताल है, जो जीपीटी हेल्थ केयर लिमिटेड के अंतर्गत संचालित होता है, जो एनएसई और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनी है।
अस्पताल में 4 बेड का समर्पित रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट, क्लास-100 ऑपरेशन थिएटर एवं ऑर्गन पास बॉक्स जैसी अत्याधुनिक और अनिवार्य सुविधाओं के साथ, इतने कम समय में पाँच सफल किडनी प्रत्यारोपण पूरा करना रायपुर अस्पताल की सशक्त क्लिनिक लक्षमता को दर्शाता है।
आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर के सी ओ ओ डॉ. सौरभ चोरड़िया ने कहा,“11 मई 2025 को आरंभ हुए लगभग 250 दिनों के भीतर ही हमने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जो रायपुर की जनता के भरोसे को दर्शाती हैं। अस्पताल ने अब तक 5 सफल किडनी प्रत्यारोपण किए हैं, 7,000 से अधिक मरीजों को सेवाएँ दी हैं, 400 से अधिक सर्जरी, 600 से अधिक कैथ लैब प्रक्रियाएँ, 340 से अधिक गैस्ट्रो प्रक्रियाएँ तथा 1,000 से अधिक डायलिसिस सत्र पूरे किए हैं। यह छत्तीसगढ़ राज्य को उच्च गुणवत्ता एवं स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे बताया कि आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर का किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम डॉ. करण सराफ, कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट फिजिशियन के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है, जिसमें डॉ. राहुल कपूर, कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन कासर्जिकल सहयोग प्राप्त है। यह कार्यक्रम अनुभवी एनेस्थेटिस्ट, इंटेंसिविस्ट, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ एवं क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स की टीम के द्वारा संचालित किया जा रहा है। प्रत्येक प्रत्यारोपण से पूर्व डोनर एवं रेसपिएंट्स के लिए चिकित्सीय जांच, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन तथा अधिकृत समिति से अनिवार्य स्वीकृति प्राप्त की गई।
इस अवसर पर डॉ. करण सराफ ने कहा,“अब तक किए गए सभी किडनी प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहे हैं। डोनर एवं रेसपिएंट्स दोनों की रिकवरी संतोषजनक रही है। सभी मरीज नियमित फॉलो-अप में हैं, उनकी किडनी सामान्य रूप से कार्य कर रही है और वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। विभिन्न आयु वर्ग के डोनर्स ने इसमें शामिल है, जिनमें सबसे अधिक आयु का डोनर 70 वर्ष का था, जो इस कार्यक्रम की सुरक्षा और सफलता को दर्शाता है। डायलिसिस की तुलना में किडनी प्रत्यारोपण एक अधिक प्रभावी एवं दीर्घकालिक उपचार विकल्प है, जो मरीजों की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करता है, बशर्ते उचित चयन और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए।”
डॉ. राहुल कपूर, सीनिय रकंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट सर्जन ने बताया कि सभी सर्जरी उनकी टीम द्वारा उन्नतशल्य तकनीकों के माध्यम से की गईं । बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव परिणाम सुनिश्चित करने के लिए डोनर की किडनी निकालने की प्रक्रिया लैप्रोस्कोपिक (की-होल) तकनीक से की गई, जिससे दर्द कम हुआ और डोनर की रिकवरी तेज रही। सामान्यतः डोनर्स को 2–3 दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। प्रत्यारोपण के पश्चात रेसपिएंट्स को समर्पित रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट (RTU) में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ संक्रमण की रोकथाम हेतु तीन-स्तरीय बैरियर इंफेक्शन कंट्रोल सिस्टम अपनाया जाता है।
आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर में सभी किडनी प्रत्यारोपण मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA) के प्रावधानों के अंतर्गत तथा संबंधित अधिकृत समिति की स्वीकृति के पश्चात ही किए गए हैं, जो डॉ. करण सराफ एवं डॉ. राहुल कपूर के मार्ग दर्शन में संपन्न हुए।
क्लिनिकल सेवाओं के साथ-साथ आई एल एस हॉस्पिटल्स, रायपुर समुदाय में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। मरीज परामर्श, शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं अस्पताल परिसर में स्थापित क्यूआर-कोड आधारित सूचना केंद्रों के माध्यम से लोगों को प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि स्वैच्छिक अंगदान को प्रोत्साहित किया जा सके।

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