रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ राज्य की विभिन्न जेलों में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा विचाराधीन बंदी एन.डी.पी.एस अधिनियम, पाक्सो अधिनियम तथा म्यूल/फर्जी बैंक खाता एवं वित्तीय अपराधों के प्रकरणों में परिरूद्ध है। अनेक प्रकरणों में यह पाया गया कि अपराध के मूल कारणों में नशा, अपरिपक्व निर्णय, आर्थिक लालच, डिजिटल अशिक्षा, सामाजिक वातावरण तथा मानसिक असंतुलन प्रमुख कारक है। जेल प्रशासन का दायित्व केवल कारावास तक सीमित न होकर बंदियों के सुधार, पुर्नवास एवं समाज में पुनः स्थापना सुनिश्चित करना है।
इसी उद्देश्य से जेल विभाग द्वारा बंदियों के सर्वागीण सुधार एवं समाज में पुनः सम्मानजनक पुर्नवास के उद्देश्य से “निश्चय” नामक सुधारात्मक योजना क्रियान्वित की जा रही है।
योजना का मुख्य उद्देश्य-
1. युवा बंदियों में अपराध-बोध की समझ एवं आत्मचितंन विकसित करना।
2. व्यवहार, सोच एवं निर्णय प्रक्रिया में सकारात्मक परिवर्तन लाना।
3. अपराधों के दुष्परिणामों से अवगत कराना।
4. आत्मसंयम, नैतिकता, संवेदनशीलता एवं सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना।
5. कौशल विकास द्वारा वैकल्पिक एवं वैध आजीविका के अवसर प्रदान करना।
6. पुनः अपराध की संभावना में कमी लाना।
इस योजना की अवधि लगभग 03 माह है, जिसमें प्रतिदिन 03 घंटे मनोवैज्ञानिक परामर्श एवं व्यवहार सुधार, कानूनी एवं नैतिक जागरूकता, नशामुक्ति एवं स्वास्थ्य जागरूकता, लैंगिक संवेदनशीलता एवं सामाजिक आचरण (पाक्सों के प्रकरणों में), डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता (म्यूल/फर्जी बैंक खाता मामलों हेतु), कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण, आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास, सामाजिक पुर्नवास एवं परिवार से समन्वय संबंधी प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण प्राप्त बंदियों के रिहाई उपरांत 06 माह तक नियमित फॉलोअप कर उनका व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन एनजीओ एवं कौशल विकास संस्थाओं के सहयोग से किया जायेगा।
प्रथम चरण में केन्द्रीय जेल रायपुर में म्यूल/फर्जी बैंक खाता मामलों में बंद 60 बंदियों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है। यह योजना छत्तीसगढ़ जेल विभाग के सुधारात्मक दर्शन के अनुरूप है तथा युवा बंदियों को दंड से सुधार की दिशा में प्रेरित करने हेतु एक प्रभावी माध्यम सिद्ध होगी।





