छत्तीसगढ़रायपुर

रायपुर में इंटरनेशनल साइबर ठगी का भंडाफोड़, 42 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर (विश्व परिवार)। राजधानी रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठगी करने वाले बड़े अवैध कॉल सेंटर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कुल 42 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से 67 मोबाइल, 18 लैपटॉप, 28 कंप्यूटर सेट और 3 वाईफाई राउटर सहित करीब 16.53 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है।
यह गिरोह रायपुर के सुभाष नगर स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स और न्यू राजेंद्र नगर के अंजनी टॉवर में अवैध कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिका सहित विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था।
गिरफ्तार मुख्य आरोपी और सुपरवाइजर
पुलिस जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर का संचालन रोहित यादव, गौरव यादव और सौरभ सिंह द्वारा किया जा रहा था।
इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों में प्रमुख रूप से—
अनिल कुमार यादव उर्फ रोहित यादव, सौरभ राजपूत, अभिषेक शर्मा, रोहित शर्मा, सोनू कुमार भारती, राहुल प्रजापति, मयूर खडपे, नितेश गुरूंग, अजय चौधरी, आदित्य कुमार, सागर कायस्थ, निखिल क्षत्रिय, चुन्ना पटेल, मोहम्मद अल्तमस, विष्णु कुशवार, ऋभ राज, दिनेश लालवानी, अनिकेत दुबे, काजल आचार्यजी, प्रकाश द्विवेदी, दीप सिंह यादव, सत्यम तिवारी, मोहम्मद गुफरान, ओम कोढवले, राजेंद्र सिंह जाला, शाह अमन, राज द्विवेदी, शिवम पांडे, ऋषभ यादव, करन परमार, अमन पांडे, रोहित कुमार चंचल, देवेश द्विवेदी सहित अन्य शामिल हैं।
वहीं न्यू राजेंद्र नगर प्रकरण में गौरव यादव, अभिषेक राजपूत, अमरेंद्र राजपूत, गुरप्रीत सिंह, मनीष पाल उर्फ मोनू, प्रताप सिंह, अजय सिंह राजपूत, राकेश राजभर और उत्तम दुबे को गिरफ्तार किया गया है।
ऐसे चलता था ठगी का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क
यह गिरोह पांच चरणों में ठगी करता था—
पहला चरण: व्हाट्सएप/टेलीग्राम के जरिए अमेरिका के लोगों का डेटा जुटाना
दूसरा चरण: लोन दिलाने का झांसा देकर बैंक डिटेल लेना और सिबिल सुधार का भरोसा देना
तीसरा चरण: क्लोन चेक के जरिए खाते में छोटी रकम डालकर विश्वास बनाना
चौथा चरण: “सिबिल सुधार” के नाम पर पैसे वापस मांगना
पांचवां चरण: एप्पल, गूगल, अमेजन जैसे गिफ्ट कार्ड के जरिए रकम वसूलकर कैश में बदलना
इसके बाद रकम हवाला के जरिए अहमदाबाद में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी।
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी वारंट से डराकर वसूली
आरोपी पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते थे और फर्जी अरेस्ट वारंट तैयार कर मानसिक दबाव बनाते थे। कॉल सेंटर में ऐसी स्क्रिप्ट और दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
कर्मचारियों को वेतन और कमीशन
कॉल सेंटर कर्मचारियों को 15 हजार रुपये मासिक वेतन और कमीशन दिया जाता था, जबकि सुपरवाइजर को 30 हजार रुपये वेतन के साथ 2 प्रतिशत कमीशन मिलता था। तकनीकी टीम (विदेश में) को 10 प्रतिशत तक हिस्सा दिया जाता था।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुलिस को सूचना मिलने के बाद टीम को दो भागों में बांटकर दोनों लोकेशन पर एक साथ रेड की गई। मौके पर कई लोग कंप्यूटर और लैपटॉप पर ठगी से जुड़ा काम करते मिले।
पुलिस ने थाना गंज और न्यू राजेंद्र नगर में विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts