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कलिंगा विश्वविद्यालय ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICSSA-2026) का आयोजन किया

रायपुर (विश्व परिवार)। कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर के प्राणीशास्त्र विभाग, ने 12–13 मार्च 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और स्मार्ट कृषि पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICSSA-2026) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। दो दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत तथा विदेशों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा उभरती हुई पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके सतत समाधान पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि सुनील मिश्रा, आईएफएस, नोडल अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा किया गया। अपने संबोधन में श्री मिश्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली और उपभोग के तरीकों में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने समाज से अधिक जिम्मेदार और सतत आदतों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपभोग से बचना चाहिए।
श्री मिश्रा ने वैश्विक संघर्षों और युद्धों का प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी बताया। उन्होंने विशेष रूप से आर्द्रभूमि (वेटलैंड) और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों का उल्लेख किया, जो ऐसे संकटों के दौरान अक्सर क्षरण और नुकसान का सामना करते हैं। उन्होंने आगे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न पहलों और योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें वन संरक्षण, जलवायु-अनुकूल विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं।
उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती समंती सरकार, वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं प्रमुख, मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर भी उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के कार्यक्षेत्र के बारे में बताया तथा कृषि को समर्थन प्रदान करने में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से किसानों को सही समय पर जानकारी मिलती है, जिससे वे बेहतर और सूचित निर्णय ले सकते हैं।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा 15 प्लेनरी, कीनोट तथा आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में कुल 166 शोध पत्रों की प्रस्तुतियाँ मौखिक और पोस्टर सत्रों के माध्यम से की गईं, जिनमें जलवायु विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण और सतत कृषि प्रथाओं से संबंधित विविध शोध विषयों को उजागर किया गया।
सम्मेलन में जम्मू एवं कश्मीर, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओड़िशा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इसे एक विविध और जीवंत शैक्षणिक आयोजन बना दिया।
सम्मेलन को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES), अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), और छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। नॉलेज पार्टनर शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, विल्सन कॉलेज, मुंबई और माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स सोसाइटी इंडिया द्वारा शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया, जबकि कॉर्पोरेट पार्टनर के रूप में सनरेक और वाइल्डलाइफ एकॉस्टिक्स ने सम्मेलन का समर्थन किया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में गुरुनाथन एन., आईएफएस, कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (क्लाइमेट चेंज), छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र और विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. संजय अरोड़ा, रजिस्ट्रार, गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने समारोह की शोभा बढ़ाई।
समापन समारोह के दौरान रायपुर के प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ए. फरिश्ता को चिकित्सा क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और समर्पित सेवा के माध्यम से अनगिनत जीवन बचाने के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

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