- 3 दिगम्बर जैन संघों के 48 संतों का मिलन
औरंगाबाद/जयपुर (विश्व परिवार)। साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंम के सानिध्य में मानसरोवर के शिप्रा पथ बी टी रोड स्थित हाऊसिंग बोर्ड ग्राऊंड पर चल रहे आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान में शुक्रवार को सार्यकाल तीन दिगम्बर जैन संघों के 48 संतों का भव्य मिलन हुआ। इस मौके पर आस पास का वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
इस मौके पर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज, आचार्य सुन्दर सागर महाराज एवं आचार्य शशांक सागर मुनिराज के संयों का मिलन का मनोरम दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। मिलन के मौके पर आसमान से गुलाब के पुष्पों की चरसात ने पूरे ग्राऊंड को गुलाबी रंग में रंग दिया। अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज जयपुर प्रवास समिति के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कौटखावदा ने बताया कि आचार्य सुन्दर सागर महाराज व आचार्य शशांक सागर मुनिराज 32 पिच्छीका के संघ सहित चैण्ड बाजों के साथ अग्रवाल फार्म बड़ी मार्केट स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से वैण्ड बाजों के साथ रवाना होकर शिप्रा पथ होते हुए अरावली पथ के तिराहे पर पहुंचे जहां आचार्य प्रसन्न सागर महाराज संघ के उपाध्याय पियूष सागर महाराज के सानिध्य में दोनों आचार्यों की भख्य अगवानी की गई।
तीनों संभों के सभी संत जुलूस के रुप में चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान ग्राऊंड के मुख्य द्वार पर पहुंचे जहां आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने दोनो आचार्यों की भव्य अगवानी की। तीनों आचार्यो के आपस में गले मिलने पर राम भरत लक्ष्मण के मिलाप के दृश्य की यादे ताजा हो गई। आचार्य, मुनि आर्यिका माताजी, क्षुल्लक सहित क्षुल्लकारे आपस में गले मिली तो श्रद्धालु जयकारों लगाते रहे। मिलन के बाद सारे संत मंच पर पहुंचे। जहां धर्म सभा का आयोजन किया गया। पुनि नैगम सागर महाराज ने देखलो जानलो साधु को… मंगलाचरण कर शुभारंभ किया। आचार्य शशांक सागर महाराज ने अपने उदबोधन में कविता के माध्यम से कहा कि वो पल बड़े खुशनसीब होते हैं जिन पलों में संतो के दर्शन नसीब होते है।
आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने कहा कि हम सब एक ही बगिया के फूल है। हमारे गुरु दिव्य तपस्यी सम्मति सागर महाराज की तरह ही अंतर्मना की साधना तपस्या भी ऊचाईयां प्राप्त करे। अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि मन, भाव और विचार ऐसे रखो कि आपके मन की निश्छलता, भावों की विशुद्धि, और विचारों की पारदर्शिता पर लोग विचार करें। अच्छा सोचे, अच्छा देखे, अच्छा बोले, अच्छा सुने, अच्छा करे, और सबके प्रति सदभाव प्रेम बनाकर बले फिर देखें, सफलता कैसे आपके चरण घूमती है। जीवन की सफलता के लिए मस्तिष्क में आइस की फैक्ट्री और जुबान पर शूगर की मशीन लगायें। जो लोग धैर्य, विवेक बुद्धि, और संकल्प के श्रम से अपने कार्य को अंजाम देते हैं, वही लोग सफलताओं के शिखर पर पहुंच पाते है। जो जीवन में आने वाली हर एक समस्या को समता की बुहारी से अपने मार्ग को बुहारते चले जाते हैं, वे लोग ही हँसते मुस्कुराते हुये एकदिन अपने लक्ष्य को पा लेते हैं। शनिवार को सात दिन से चल रहे श्री श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान का विश्व शांति महायज्ञ के साथ समापन होगा। कोषाध्यक्ष कैलाश चन्द छाबड़ा ने बताया कि रविवार, 01 फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव का आयोजन होगा। रविवार को प्रातः 7.00 बजे से 1 वर्ष से 25 वर्ष तारू के विवाहित जीवन जीने वाले आचार्य श्री को श्रीफल भेंट किया दिगंबर जैन आचार्यश्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ को नैमिसागर कालोनी में प्रवास हेतुसमाज द्वारा श्रीइल भेंटकर निमंत्रित किया गया। श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन समक्ष समिति के अध्यक्ष जे के जैन कालाडेर ने बताया कि संघ में वर्तमान में 16 मुनि पर्व आर्थिकायें सम्मिलित है। इस अवसर पर श्रेष्ठी विमल पाटनी, पूनमटोलिया, प्रदीप निगोलिया, संजीव कासलीवाल, विजय बडजात्या, विरेंद्र गोधा, जैना गंगवाल मुन्नी ठोलिया संतोष बाकलीवाल समाज की महिलाएं पर्व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
दम्पतियों के लिए विशेष रूप से आयोजित होने वाले इस महोत्सव में इन दम्पति सदस्यों को आदर्शमयी वैवाहिक जीवन एवं संयम और संस्कार युक्त आचरण के बारे में बताते हुए जीवन में सामंजस्य एवं समन्वय स्थापित कर आपसी रिश्ते में मजबूती एवं सफलता के बिन्दु बताए जाएंगे।





