- “21वीं सदी के भारत को चाहिए AI, रोबोटिक्स और बायोटेक विशेषज्ञ इंजीनियर”: बृजमोहन अग्रवाल
- UPSC की 100 साल पुरानी परीक्षा पद्धति में बदलाव और हिंदी में इंटरव्यू कराने का रखा प्रस्ताव
नई दिल्ली / रायपुर (विश्व परिवार)। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने गुरुवार को लोकसभा में ‘नियम 377’ के तहत देश की प्रतिष्ठित ‘इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा’ (ESE) में क्रांतिकारी बदलावों की मांग उठाई है। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि 100 वर्ष पुरानी इस परीक्षा प्रणाली को वर्तमान वैश्विक तकनीकी परिवेश के अनुरूप ढालना अब समय की अनिवार्य आवश्यकता है।
तकनीकी नवाचार और भविष्य का भारत
सांसद अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में UPSC द्वारा आयोजित यह परीक्षा केवल चार पारंपरिक श्रेणियों (सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स) तक सीमित है। जबकि आज का भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI जैसी तकनीकों में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।
श्री अग्रवाल ने पुरजोर तरीके से कहा कि, “आज हमारे देश को केवल पारंपरिक इंजीनियरों की ही नहीं, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), रोबोटिक्स, बायोटेक और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भी आवश्यकता है। यदि हम सरकारी तंत्र में इन विधाओं के विशेषज्ञों को शामिल करेंगे, तभी हम भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे और नवाचार को सरकारी कार्यप्रणाली का हिस्सा बना सकेंगे।”
तकनीकी सुधारों के साथ-साथ श्री अग्रवाल ने भारतीय भाषाओं के सम्मान और समावेशित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने मांग की कि इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा के इंटरव्यू (साक्षात्कार) को हिंदी में भी आयोजित किया जाए। उनका मानना है कि भाषा किसी भी मेधावी छात्र की प्रतिभा के आड़े नहीं आनी चाहिए और मातृभाषा में अभिव्यक्ति से ग्रामीण व हिंदी भाषी क्षेत्रों के प्रतिभावान इंजीनियरों को समान अवसर प्राप्त होंगे।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल की इस दूरगामी सोच की सराहना की जा रही है, क्योंकि यह न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगी, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।





