- सुरक्षा बलों को ताड़पाला हिल्स में मिला विस्फोटक व राशन का डंप
- बीयर की बोतलें और सोलर प्लेटें भी मिलीं
जगदलपुर (विश्व परिवार)। बस्तर संभाग में सक्रिय नक्सली अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग तो कर ही रहे हैं, अब वे ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए आधुनिक तकनीक भी अपनाने लगे हैं। वे जंगलों में अपने आश्रय स्थलों को सोलर एनर्जी से रौशन करते हैं, मोबाइल फोन और संचार उकरणों की चार्जिंग भी सौर ऊर्जा से ही करते हैं। नक्सलियों के डंप से कई दफे सोलर प्लेटें बरामद की जा चुकी हैं, जो नक्सलियों की जीवनशैली में बदलाव की कहानी बयां करती है।
दरअसल बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में सीआरपीएफ 196वीं वाहिनी और कोबरा बटालियन 204वीं वाहिनी की टीम ने एकबार फिर नक्सल विरोधी अभियान के तहत शुक्रवार को उसूर थाना क्षेत्र के ताड़पाला हिल्स एरिया में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों द्वारा दो जगहों पर जमीन के भीतर प्लास्टिक ड्रम एवं पॉलिथिन में छुपाकर रखी गई विस्फोटक सामग्री, राशन एवं अन्य नक्सल सामग्री बरामद की है। नक्सली डंप से 13 नग डेटोनेटर, 11 किलोग्राम गन पावडर
4 नग प्लास्टिक ड्रम, दो नग
स्टील ड्रम, दो नग लोहे के ड्रम, नक्सली वर्दी, जूते, कैप, डोरी, यूएसबी केबल, सोलर प्लेट एवं माओवादी साहित्य बरामद किए गए हैं।नक्सलियों द्वारा जमीन में बीयर की 13 बोतलों में प्रेशर स्विच सिस्टम से लगाए गये आइईडी तथा लोहे के पाईप में बने नग डायरेक्शन आइईडी भी मौके से बरामद किए गए। बरामद सभी आइईडी को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा टेकमेटला कुंजामपारा क्षेत्र में निर्मित नक्सली स्मारक को भी ध्वस्त किया गया। नक्सली पहले जंगलों में स्थित अपनी पनाहगाहों और प्रशिक्षण शिविरों में लालटेन, ढीबरी और पेट्रोमैक्स से रौशनी किया करते थे। उनके पास पहले भरमार बंदूकें, सिंगल शॉट गन साधारण रायफल्स हुआ करती थीं। अब वे रौशनी के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने लगे हैं। इसी से नक्सली अपने मोबइल फोन, वॉकी टॉकी तथा अन्य संचार उपकरणों को चार्ज करते हैं। भरमार बंदूकों सिंगल शॉट गन और साधारण रायफलों की जगह नक्सली अब माउजर गन, एसएलआर, इंसास जैसे अत्याधुनिक हथियार से लैस हो चुके हैं।
जंगल में मंगल भी…!
सुरक्षा बलों के एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान नक्सली डंप से अक्सर महंगी शराब और बीयर की खाली बोतलें भी बरामद होती आई हैं। यह इस बात का संकेत है कि नक्सली जंगल में मंगल मनाते हैं, जमकर मौज मस्ती करते हैं। जमकर शराब और बीयर का दौर चलता है। रही मुर्गा मटन की बात, तो उसकी जरूरत जंगल से ही पूरी हो जाती है। जंगलों में मिलने वाले जंगली मुर्गों, तीतर, बटेर, चीतल, हिरण का शिकार कर वे मांस का इंतजाम कर लेते हैं। चावल, दाल, आटा, नमक, मिर्च मसाले वे शहरों से खरीद ले जाते हैं।






