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नौकरी नहीं तो जल समाधि! 2300 अभ्यर्थियों का उग्र होता संघर्ष

रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के 2300 चयनित डीएड अभ्यर्थियों का संघर्ष आज अपने 98वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और सम्मान की लड़ाई बन गया है, जहां अभ्यर्थी अपनी पीड़ा और उम्मीदों के साथ हर दिन सरकार से गुहार लगा रहे हैं। आज का आंदोलन भावुक और पीड़ादायक रूप ले लिया, जब अभ्यर्थियों ने अपने हक की मांग को लेकर घुटनों के बल चलकर 2300 पदों पर शीघ्र नियुक्ति की अपील की। इस दौरान कई अभ्यर्थियों के घुटने लहूलुहान हो गए और कई के पैरों में गंभीर घाव व फफोले पड़ गए, फिर भी उनका हौसला नहीं टूटा।

इसी क्रम में आंदोलन को और अधिक गंभीरता से प्रस्तुत करने के लिए अभ्यर्थियों ने तूता धरना स्थल के पीछे स्थित तालाब में जल समाधि लेने का प्रयास किया। यह दृश्य अत्यंत मार्मिक और झकझोर देने वाला था, जहां अपने अधिकारों से वंचित युवा अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में उतर गए।

इस दौरान कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह केवल शारीरिक चोट नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है, जो अपने ही युवाओं को इस स्थिति में पहुंचा रही है। वहीं 10 डीएड अभ्यर्थी को मेडिकल चेकअप के बहाने झूठ बोल कर अभनपुर थाना ले जाया गया और भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 170, 126 और 136 के तहत कार्रवाई करते हुए सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अब उनका धैर्य टूटता हुआ दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि क्या सरकार इन युवाओं की पीड़ा को समझेगी या फिर कोई बड़ा अनहोनी होने का इंतजार करेगी?
अभ्यर्थियों ने सरकार से हाथ जोड़कर मांग की है कि 2300 पदों पर तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए और इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि यह केवल नौकरी की मांग नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य, आत्मसम्मान और जीवन की लड़ाई है।
डीएड अभ्यर्थियों की 24 दिसंबर से जारी चरणबद्ध आंदोलन की पूरी टाइमलाइन
चरण 1: आमरण अनशन की शुरुआत
24 दिसंबर से डीएड अभ्यर्थियों ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया
उद्देश्य: हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर वैध नियुक्ति दिलाना
चरण 2: शांतिपूर्ण विरोध की शुरुआत
1 दिन का मौन धरना
संदेश: “हमारी आवाज़ को शांत मत समझिए, यह न्याय की पुकार है”
कैंडल मार्च
संदेश: अंधेरे में भी न्याय की उम्मीद जिंदा है
चरण 3: समाज को जोड़ने का प्रयास
“एक कप चाय न्याय के नाम” अभियान
आम जनता को जोड़कर समर्थन जुटाने की कोशिश
सांकेतिक भीख मांगकर प्रदर्शन
बेरोजगारी और मजबूरी की सच्चाई दिखाने का प्रयास
चरण 4: विनम्र और त्यागपूर्ण प्रदर्शन
दंडवत प्रणाम यात्रा
सरकार से विनम्र निवेदन का प्रतीक
घुटनों के बल चलना
अपनी पीड़ा और संघर्ष को दिखाने का भावनात्मक तरीका
चरण 5: धार्मिक और सांस्कृतिक माध्यम से अपील
रामनवमी पर कलश यात्रा
आस्था के साथ न्याय की मांग
14 मंत्रियों के नाम से 108 दीप प्रज्वलित
सरकार तक सकारात्मक ऊर्जा और संदेश पहुंचाने का प्रयास
हनुमान चालीसा पाठ (1 दिन)
आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से न्याय की प्रार्थना
नवकन्या पूजा
परंपरा और आस्था के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित
चरण 6: कठोर और प्रतीकात्मक आंदोलन
जल सत्याग्रह
शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ विरोध का प्रतीक
अंगारों पर चलना
यह दर्शाने के लिए कि “हम दर्द सहने को तैयार हैं, लेकिन अन्याय नहीं”
चरण 7: सीधे संवाद का प्रयास
शिक्षा मंत्री के बंगले पर जाकर निवेदन
लोकतांत्रिक तरीके से सीधे संवाद की कोशिश

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