रायपुर (विश्व परिवार)। राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (एनएसएसटीए) के सहयोग से पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के सांख्यिकी अध्ययन विद्यालय द्वारा “आधिकारिक सांख्यिकी और भारतीय सांख्यिकी प्रणाली के बारे में जागरूकता और संवेदनशीलता” पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एम. एल. श्रॉफ ऑडिटोरियम, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में हुआ, जिसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों, शोधकर्ताओं और हितधारकों को आधिकारिक सांख्यिकी के बारे में शिक्षित करना था।
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत उत्कृष्टता केंद्र एनएसएसटीए, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सर्वेक्षण पद्धतियों, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और एआई में क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है। रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस. शुक्ला ने कार्यशाला की अध्यक्षता की, जिसमें राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) फील्ड ऑपरेशन डिवीजन, क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के उप महानिदेशक, अल्ताफ हुसैन हाजी आईएसएस मुख्य अतिथि थे। एनएसएसटीए के निदेशक शिव बालक वर्मा ने विशेष अतिथि के रूप में कार्य किया, जबकि एनएसओ रायपुर की उप निदेशक सुश्री सचिता राकेश अग्रवाल ने भी भाग लिया।
प्रो. डी.के. स्कूल ऑफ़ स्टडीज़ इन स्टैटिस्टिक्स के हेड, गंगेश्वर ने आए हुए लोगों का स्वागत किया और वर्कशॉप के मकसद बताए, जिसके बाद दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।
भाषण की खास बातें:
अपने पहले भाषण में, वाइस चांसलर शुक्ला ने पॉलिसी बनाने में स्टैटिस्टिक्स की भूमिका, डेटा एनालिसिस में AI टूल्स और इन्फॉर्मेशन के दौर में रिसोर्स शेयरिंग पर ज़ोर दिया। चीफ गेस्ट श्री हाजी ने ऑफिशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टैटिस्टिक्स, सेंसस के टाइप, NSO सर्वे, स्टैटिस्टिकल लिटरेसी, नौकरी के मौकों पर बात की और देश बनाने में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया। मुख्य वक्ता श्री वर्मा ने स्टैटिस्टिक्स को “डेवलपमेंट का ग्रामर”, भारत की डेटा रिचनेस और डेटा साइंस की अहमियत बताया। सुश्री अग्रवाल ने NSO की भूमिका और चल रहे सर्वे के बारे में डिटेल में बताया।
वर्कशॉप का प्रभाव:
हिस्सा लेने वालों को प्लानिंग, पॉलिसी बनाने और फैसले लेने में डेटा कलेक्शन, क्वालिटी, चुनौतियों और एप्लीकेशन के बारे में जानकारी मिली। इस इवेंट ने सबूतों पर आधारित डेवलपमेंट के लिए एथिकल स्टैंडर्ड, ट्रांसपेरेंसी और स्टैटिस्टिकल प्रोसेस की समझ को बढ़ाया। डॉ. प्रदीप चौरसिया ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।





