रायपुर (विश्व परिवार)। ट्रांसजेंडर समुदाय ने नए कानून के विरोध में रायपुर में आवाज बुलंद की है। छत्तीसगढ़ मितवा संकल्प समिति द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में समुदाय के लोगों ने ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 का विरोध किया।
समिति की अध्यक्ष विद्या राजपूत ने कहा कि यह नया कानून ट्रांसजेंडर समुदाय के पहचान के अधिकारों का हनन करता है। इसमें ट्रांसमेन, ट्रांसवुमेन, नॉन-बाइनरी और जेंडर क्वियर जैसे कई वर्गों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे यह कानून भेदभावपूर्ण बन गया है।
उन्होंने मेडिकल बोर्ड की अनिवार्यता पर भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान तय करना उसका व्यक्तिगत अधिकार है, न कि डॉक्टरों के पैनल का। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के NALSA (2014) फैसले के खिलाफ है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने धारा 18 के संभावित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस प्रावधान के जरिए किसी भी गुरु या परिवार के सदस्य को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है, जिससे किन्नर समुदाय की पारंपरिक गुरु-चेला व्यवस्था पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिना परामर्श के बनाया गया यह कानून असंवैधानिक है और इससे समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
समिति ने केंद्र सरकार से इस संशोधन विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि मांग पूरी नहीं होने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे तथा न्यायपालिका का सहारा लिया जाएगा।
इसी के तहत सोमवार शाम 4 बजे स्पर्शशाला मैदान से नगर निगम होते हुए प्रेस क्लब तक विरोध रैली भी निकाली जाएगी।





