चंडीगढ़/पंजाब (विश्व परिवार)। पंजाब के माननीय राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आज छत्तीसगढ़ से आए 14 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय भेंट की। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित अंतर-राज्यीय अध्ययन यात्रा के अंतर्गत यह प्रतिनिधिमंडल पंजाब प्रवास पर है। इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने पत्रकारों के साथ संवाद करते हुए राज्य में नशामुक्ति अभियान, सीमापार तस्करी की चुनौतियों तथा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
संवाद के दौरान राज्यपाल महोदय ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारों से बस्तर क्षेत्र की नक्सल प्रभावित स्थिति के बारे में भी विशेष रुचि लेकर जानकारी प्राप्त की। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक परिस्थितियों, विकास कार्यों तथा सुरक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति के बारे में प्रश्न पूछे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानने का प्रयास किया कि नक्सल समर्पण के बाद पूर्व उग्रवादियों के परिवारों और परिजनों को मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ रही है और समाज में उन्हें किस तरह स्वीकार किया जा रहा है।
पत्रकारों ने राज्यपाल महोदय को जानकारी दी कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है तथा विकास कार्यों के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि नक्सल समर्पण करने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उनमें विश्वास और स्थायित्व की भावना विकसित हो रही है।
राज्यपाल महोदय ने इस संदर्भ में कहा कि किसी भी क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास के लिए केवल सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होते, बल्कि सामाजिक समावेशन और पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है कि प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल हो रही है।
इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने पंजाब में नशामुक्ति के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या एक गंभीर चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सरकार बहु-स्तरीय रणनीति के तहत कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सीमापार से नशीले पदार्थों और अवैध शस्त्रों की तस्करी एक प्रमुख समस्या है, जिस पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा एजेंसियां निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ड्रग माफिया तस्करी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है, जिसमें ड्रोन का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। पहले बड़े ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया गया है, लेकिन अब छोटे और अत्याधुनिक ड्रोन एक नई चुनौती बनकर उभरे हैं। ये ड्रोन आवाज तो करते हैं, लेकिन आसानी से दिखाई नहीं देते, जिससे इनका पता लगाना कठिन हो जाता है।
राज्यपाल महोदय ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार तकनीकी रूप से अपने तंत्र को सशक्त बना रही है और निगरानी एवं खुफिया व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में ड्रग तस्करी ने दुर्भाग्यवश एक संगठित व्यवसाय का रूप ले लिया है और इसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 31 हजार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, दो बड़े ड्रग माफिया सरगनाओं को भी गिरफ्तार किया गया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अवसर पर उन्होंने पंजाब की स्वास्थ्य सेवाओं की भी सराहना की और कहा कि राज्य में सरकारी एवं निजी दोनों स्तरों पर चिकित्सा सुविधाएं सुदृढ़ और संतोषजनक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नशामुक्ति अभियान में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके तहत उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
यह उल्लेखनीय है कि पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित यह मीडिया अध्ययन यात्रा देश के विभिन्न राज्यों में हो रहे विकास कार्यों, प्रशासनिक प्रयासों और सामाजिक अभियानों को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
अंत में, यह मुलाकात विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच साबित हुई, जिसने मीडिया और प्रशासन के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधिमंडल की ओर से राज्यपाल महोदय को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान का प्रतीक गमछा एवं बस्तर कला से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।





